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Answer» साधारण नागरिकों के जीवन का पुनर्चित्रण करने के लिए इतिहासकार विभिन्न स्रोतों का सहारा लेते हैं ⦁ इतिहासकार साधारण नागरिकों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए ग्रंथों के साथ-साथ अभिलेखों, सिक्कों और चित्रों | का भी विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों के रूप में प्रयोग करते हैं। वे सिक्कों और चित्रों से भी साधारण लोर्गों के बारे में जानने | का प्रयास करते हैं। ⦁ अभिलेखों से हमें साधारण लोगों की भाषाओं के बारे में जानकारी मिलती है। प्राकृत उत्तरी भारत में और तमिल दक्षिण भारत में सर्वसाधारण की भाषा होती थी। उत्तर भारत में कुछ लोग पालि और संस्कृत का प्रयोग करते थे। ⦁ भारतीय समाज के साधारण लोगों के बारे में वैदिक साहित्य से पर्याप्त जानकारी मिलती है। ⦁ विभिन्न साहित्यिक साधनों से उत्तर भारत, दक्षिण भारत और कर्नाटक जैसे अनेक क्षेत्रों में विकसित हुई बस्तियों के विषय | में जानकारी मिलती है। इनसे दक्कन और दक्षिण भारत में चरवाहा बस्तियों के प्रमाण भी मिलते हैं। ⦁ इतिहासकार शवों के अंतिम संस्कार के तरीकों से भी साधारण नागरिकों के जीवन का चित्रण करते हैं। साधारण लोगों के शवों के साथ विभिन्न प्रकार के लोहे से बने उपकरणों और हथियारों को भी दफनाया जाता था। ⦁ इतिहासकार साधारण नागरिकों के जीवन के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए दान-संबंधी आदेशों और रिकॉर्डों को भी । अध्ययन करते हैं। भूमिदान से संबंधित विज्ञप्तियों से कृषि-विस्तार और कृषि के ढंग और उपज बढ़ाने के तरीकों के बारे में। जानकारी मिलती है। भूमिदान के प्रचलन से राज्यों और किसानों के बीच के संबंधों की झाँकी मिलती है। ⦁ नगरों में रहने वाले सर्वसाधारण लोगों में धोबी, बुनकर, लिपिक, बढ़ई, कुम्हार, स्वर्णकार, लौहकार, छोटे व्यापारी और छोटे धार्मिक व्यक्ति आदि होते थे।
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