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सामाजिक परिवर्तन को अन्य परिवर्तनों से किस प्रकार अलग किया जा सकता है? |
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Answer» ‘सामाजिक परिवर्तन’ समाजशास्त्र की एक विशिष्ट संकल्पना है। इस नाते समाजशास्त्र में इसका उपयोग भी विशिष्ट अर्थों में किया जाता है। गिलिन एवं गिलिन (Gillin and Gillin) के अनुसार, “सामाजिक परिवर्तन जीवन के स्वीकृत प्रकारों में परिवर्तन है। भले ही ये परिवर्तन भौगोलिक दशाओं से हुए हों, या सांस्कृतिक साधनों पर जनसंख्या की रचना अथवा सिद्धांतों के परिवर्तन से हुए हों, या प्रसार से या समूह के अंदर ही आविष्कार से हुए हों।” वस्तुत: सामाजिक परिवर्तन समाज के विभिन्न पक्षों में होने वाला परिवर्तन है जिससे सामाजिक संबंध और सामाजिक संस्थाओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ‘सामाजिक परिवर्तन’ एक सामान्य संकल्पना है जिसका प्रयोग किसी भी ऐसे परिवर्तन के लिए किया जा सकता है जो अन्य संकल्पना द्वारा परिभाषित नहीं किया जा सकता। इस दृष्टि से सामाजिक परिवर्तन अन्य परिवर्तनों से भिन्न है। उदाहरणार्थ-यह आर्थिक तथा राजनीतिक परिवर्तन से भिन्न है। इसी भाँति, यह भौगोलिक या संस्कृति में होने वाले परिवर्तन से भिन्न है। समाजशास्त्रियों को इसके व्यापक अर्थ को विशिष्ट बनाने के लिए काफी परिश्रम करना पड़ा है। अन्य परिवर्तनों से भिन्न होने के बावजूद एक विस्तृत संकल्पना होने के नाते सामाजिक परिवर्तन को उनसे अलग कर पाना कठिन है। इतना ही नहीं, अनेक राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक कारण सामाजिक परिवर्तन के लिए उत्तरदायी हैं। उदाहरणार्थ-श्रम-विभाजन का विकास एक आर्थिक परिवर्तन है परंतु इसका अध्ययन समाजशास्त्र में भी इसलिए किया जाता है क्योंकि इसके समाज पर दूरगामी प्रभाव पड़ते हैं। मतदान व्यवहार राजनीतिक व्यवहार है परंतु समाजशास्त्र में इसका अध्ययन इसलिए किया जाता है क्योंकि यह व्यवहार अनेक सामाजिक कारकों से प्रभावित होता है। |
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