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साझेदारी संस्था की मर्यादाएँ/सीमाएँ (Limitation) समझाइए ।

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साझेदारी संस्था के दोष अथवा मर्यादाएँ (Limitation of Partnership) निम्नलिखित हैं :

(1) सीमित आयुष्य : साझेदारी संस्था का आयुष्य सीमित होता है क्योंकि साझेदारों की निवृत्ति, पागलपन, मृत्यु, दिवालियापन इत्यादि स्थिति में साझेदारी संस्था का अस्तित्व लम्बे समय तक नहीं टिक पाता है ।

(2) असीमित जिम्मेदारी (दायित्व) : इसमें प्रत्येक साझेदार का दायित्व असीमित होता है, जिससे संस्था को अच्छी शान मिलती है, परन्तु साझेदारों के लिए जोखिमभरा होता है । संस्था में अधिक हानि होने पर ऋण की अदायगी करने हेतु साझेदारों को अपनी व्यक्तिगत (निजी) सम्पत्तियों का त्याग करना पड़ता है, जिससे उनका परिवार बेघर भी हो सकता है । असीमित दायित्व के कारण भी वह जोखिम उठाना पसन्द नहीं करता ।

(3) हिरसे के हस्तान्तरण में कठिनाई : साझेदारी संस्था में साझेदार अपना हिस्सा अन्य व्यक्ति को सभी साझेदारों की सहमति के बिना नहीं दे सकता । अर्थात् सहमति लेना अनिवार्य होता है अन्यथा हिस्से का परिवर्तन अन्य व्यक्ति को नहीं कर सकता ।

(4) विसंवादिता की सम्भावना : साझेदारी संस्था में जब तक सभी साझेदारों के मध्य मधुर सम्बन्ध होते हैं तभी तक संस्था का संचालन व्यवस्थित होता है । यदि किसी एक साझेदार के साथ वाद-विवाद (Disput) उत्पन्न हो जाता है तो, साझेदारी संस्था के अस्तित्व के लिए खतरा हो जाता है । जिसका विपरीत असर संस्था पर पड़ता है । इन समस्याओं को दूर करने के लिए साझेदारों की संख्या सीमित की जा सकती है ।

(5) स्वतंत्र व्यक्तित्व का अभाव : कम्पनी की तरह साझेदारी संस्था का अलग स्वतंत्र व्यक्तित्व नहीं होता है । साझेदारी संस्था अपने साझेदारों से अपने नाम से अलग सम्पत्ति नहीं रख सकती । दूसरी संस्था के साथ साझेदारी नहीं कर सकती । इसके अलावा किसी भी कम्पनी में सदस्य भी नहीं बन सकती ।

(6) विश्वास की कमी : साझेदारी संस्था का हिसाब निजी रहता है एवं इसके संचालन पर सरकारी नियंत्रण कम होता है । जिससे बाहरी व्यक्तियों अथवा संस्थाओं को संस्था-सम्बन्धी आवश्यक जानकारी नहीं रहती है । जिससे वे संस्था पर कम विश्वास करते हैं एवं संस्था के साथ व्यवहार सोच-समझकर करते हैं ।

(7) सीमित पूँजी : साझेदारी संस्था में बड़ी इकाईयों अथवा कम्पनियों की अपेक्षाकृत कम पूँजी देखने को मिलती है । कम पूँजी होने से धन्धे का विकास नहीं हो पाता तथा संशोधन जैसे कार्य भी नहीं किये जा सकते है ।



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