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साझेदारी के प्रकार बताकर प्रत्येक पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए । |
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Answer» सामान्य रूप से प्रत्येक साझेदार धन्धे में पूँजी लगाता है, संचालन में हिस्सा लेता है तथा लाभ में भी हिस्सा प्राप्त करता है । कितनी बार साझेदार धन्धे में उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं तो कितनी ही बार निष्क्रिय रहकर सिर्फ धन्धे के लाभ में ही भाग लेने में रस रखते हैं । इस तरह, साझेदारों के हित की कक्षा अलग-अलग होती है । साझेदारों के कार्य, गुण और अधिकार के आधार पर | उसके निम्नलिखित प्रकार किये गये हैं : (1) सक्रिय साझेदार (Active Partner) : जो साझेदार पेढ़ी में पूँजी लगाता है, लाभ-हानि को भोगता है और पेढ़ी के संचालन में सक्रिय हिस्सा लेता है उसे सक्रिय साझेदार कहा जाता है । ऐसे साझेदारों की जिम्मेदारी अमर्यादित होती है । इससे पेढ़ी के नुकसान या ऋण के लिये उसे ही जिम्मेदार माना जाता है । आवश्यकता पड़ने पर उसे अपनी निजी मिल्कतों को बेचकर भी ऋण चुकता करना पड़ता है । (2) निष्क्रिय साझेदार (Sleeping or Inactive Partner) : जो साझेदार दूसरे साझेदारों की तरह पेढ़ी में पूँजी लगाते हैं, लाभहानि को भी भोगते हैं, परंतु पेढ़ी के संचालन में सक्रिय भाग नहीं लेते, उन्हें निष्क्रिय या सुषुप्त साझेदार कहते हैं । ऐसे साझेदारों का दायित्व असीमित होता है । (3) नाममात्र का साझेदार (Nominal Partner) : जो साझेदार पेढ़ी में पूँजी नहीं लगाते, लाभ-हानि नहीं भोगते तथा पेढ़ी के संचालन में भी भाग नहीं लेते, परंतु पेढ़ी को शान प्राप्त हो इस तरह सिर्फ खुद का नाम ही पेढ़ी को देते हैं, उन्हें नाममात्र का साझेदार कहा जाता है । ऐसे साझेदारों का दायित्व भी असीमित होता है । नयी पेढ़ी के लिये ऐसा साझेदार उपयोगी है । वह पेढ़ी के संचालन के साथ सीधे नहीं परंतु अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा रहता है । वह पेढ़ी के नुकसान के लिये अन्य साझेदारों की तरह ही जिम्मेदार गिना जाता है । पेढ़ी के संचालन पर उसका परोक्ष काबू होता है । (4) मात्र लाभ का साझेदार : जो व्यक्ति पेढ़ी के धन्धे में पूँजी लगाये या न लगाये परंतु सिर्फ पेढ़ी के लाभ में ही भाग ले, हानि में नहीं, उसे मात्र लाभ का साझेदार कहते हैं । पेढ़ी के मैनेजर या खास कुशलतावाले कर्मचारी को इस तरह से साझेदार बनाया जा सकता है । (5) मानद साझेदार : अगर कोई व्यक्ति अपनी वाणी, आचरण या लिखावट से खुद पेढ़ी का साझेदार है ऐसा दिखावा करे और उसके आधार पर कोई त्राहित व्यक्ति पेढ़ी को ऋण प्रदान करे तो वह दिखावा करनेवाला व्यक्ति इस ऋण के लिये मानद साझेदार मान कर जिम्मेदार कहलायेगा । वह पेढ़ी में करार नहीं करता, संचालन में भाग नहीं लेता या लाभ में हिस्सा भी प्राप्त नहीं करता । (6) अवयस्क साझेदार : नाबालिग व्यक्ति करार करने में समर्थ नहीं होता । अर्थात् वह साझेदार नहीं बन सकता, परंतु उसे साझेदारी के लाभ के लिये पेढ़ी में शामिल किया जा सकता है । मृत्यु प्राप्त साझेदार के अवयस्क बालक को इस तरह से साझेदारी में शामिल किया जा सकता है । इस तरह उसे पेढ़ी के लाभ में हिस्सा देने के लिये पेढ़ी में शामिल किया जाता है । ऐसे व्यक्ति की निजी मिल्कियत पेढी के ऋण के लिये जिम्मेदार नहीं रहती । ऐसा व्यक्ति अवयस्क साझेदार नहीं कहलाता । हालांकि वयस्क होने पर छ: मास के भीतर अगर उसकी इच्छा हो तो साझेदार बनना पसंद कर सकता है । अगर उसे साझेदार के रूप में न रहना हो तो वयस्क होने पर छ: मास के अंदर |
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