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साझेदारी का अर्थ समझाइए । |
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Answer» भारतीय साझेदारी कानून 1932 की कलम-4 के अनुसार निम्न व्याख्या दी गई है – अर्थात् उपरोक्त व्याख्या से यह स्पष्टता होती है की करार करने के लायक धंधा होना चाहिए एवं लाभ करने के मुख्य उद्देश्य के साथ कानूनन रूप से स्वीकृत धंधा ही साजेदारी के रूप में जाना जायेगा । इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि जो व्यक्ति साझेदारी में शामिल हो वह व्यक्तिगत रूप से साझेदार कहलायेंगे और साझेदारी में जुड़े हुए व्यक्तिओं के द्वारा संयुक्त रूप से चलाये जाने वाले धंधे का ‘साझेदारी पेढी’ (Partnership Firm) कहा जायेगा । |
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