1.

साझेदार की निवृत्ति के संजोग बताइए।।

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भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 के अनुसार साझेदारी पेढ़ी में से कोई साझेदार शारीरिक या मानसिक रूप से अस्वस्थ हो अथवा स्वयं स्वेच्छा से निवृत्ति ले ले या आकस्मिक कारणों से उसका निधन (मृत्यु) हो जाए तो साझेदारी का अंत होता है परंतु साझेदारी पेढी का विसर्जन नहीं होता परंतु पुराने साझेदार किसी एक साझेदार की निवृत्ति या मृत्यु के बाद साझेदारी पेढ़ी चालु रख सकते हैं। साझेदार की निवृत्ति या मृत्यु की असर साझेदारी पेढ़ी में देने के शेष साझेदार पेढ़ी चालु रखते हैं ।

साझेदार की निवृत्ति संयोग (Circumstances of Retirement of a Partner) : साझेदार की निवृत्ति के संयोग निम्नानुसार दो भागों में बाटे जा सकते हैं ।

(A) भारतीय साझेदारी धारा (अधिनियम) के अनुसार (According to the Indian Partnership Act)

(B) साझेदार के निजी कारणों से स्वैच्छिक निवृत्ति (Voluntary Retirement due to Personal reasons of a partner)



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