1.

साहस अथवा उद्यम से आप क्या समझते हैं ? एक साहसी क्या कार्य करता है ?याउद्यम से आप क्या समझते हैं ? उत्पादन में उद्यमी का क्या महत्त्व है?या‘साहसी का अर्थ समझाइए। एक सफल साहसी के चार गुणों का वर्णन कीजिए।

Answer»

साहस अथवा उद्यम

प्रत्येक व्यवसाय या उत्पादन-कार्य में कुछ जोखिम (Risk) या अनिश्चितता अवश्य होती है, क्योंकि उत्पादन की मात्रा भविष्य की माँग पर आधारित होती है। यदि माँग का अनुपात ठीक रहता है तब उद्यमी को लाभ होता है, अन्यथा हानि ही होती है। उत्पादन-कार्य में लाभ व हानि दोनों की सम्भावना होती है। इस प्रकार अर्थशास्त्र में किसी उत्पादन या व्यवसाय की अनिश्चितता या जोखिम को साहस या उद्यम कहते हैं।” इसे अनिश्चितता को सहन करने वाले व्यक्ति को साहसी अथवा उद्यमी कहते हैं।

प्रो० जे०के० मेहता के अनुसार, “उत्पादन में सदैव कुछ-न-कुछ जोखिम रहता है। इस जं.खिम से उत्पन्न होने वाली हानियों को सहन करने के लिए किसी-न-किसी व्यक्ति की आवश्यकता होती है। जो व्यक्ति इन हानियों को सहन करता है, उसे साहसी या उद्यमी कहते हैं।”

उद्यमी का महत्त्व

आधुनिक युग में साहसी या उद्यमी का स्थान महत्त्वपूर्ण है। वह सम्पूर्ण उत्पादन व्यवस्था का आधार, संचालक व निर्णायक है, क्योंकि प्रत्येक व्यवसाय में कुछ-न-कुछ जोखिम अवश्य होता है और जब तक इस जोखिम को उठाने के लिए कोई व्यक्ति तैयार नहीं होगा, तब तक व्यवसाय प्रारम्भ नहीं होगा। अतः उद्यमी का महत्त्व निम्नवत् व्यक्त किया जा सकता है –

  1. उद्यमी उत्पादन का आधार है।
  2. देश की आर्थिक उन्नति एवं विकास एक बड़ी सीमा तक कुशल और योग्य साहसियों पर निर्भर करता है।
  3. साहसी ही उत्पादन के अन्य उपादानों को पारिश्रमिकों का भुगतान करता है।
  4. साहसी वास्तव में एक सेनापति का कार्य करता है। अतः औद्योगिक संगठन में साहसी का महत्त्व अधिक है।

साहसी अथवा उद्यमी के कार्य

साहसी अथवा उद्यमी के कार्यों को निम्नलिखित तीन भागों में बाँटा जा सकता है –

(क) निर्णयात्मक कार्य – एक उद्यमी को निर्णय सम्बन्धी निम्नलिखित कार्य करने पड़ते हैं

  1. उद्योग या व्यवसाय का चुनाव
  2. वस्तु का चुनाव
  3. उत्पादन स्थल का चुनाव
  4. उत्पादन के आकार का निर्णय तथा
  5. उत्पादन के उपादानों का एकत्रीकरण।

(ख) वितरणात्मक कार्य – उद्यमी को उत्पादन-कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए विभिन्न उपादानों का सहयोग प्राप्त करना पड़ता है। उत्पादन के उपादानों के सहयोग, त्याग एवं परिश्रम के लिए उद्यमी को उन्हें उचित पारिश्रमिक देना पड़ता है। यह पारिश्रमिक उद्यमी को उत्पादन के साधनों की सीमान्त उत्पादकता को ध्यान में रखकर देना होता है।

(ग) जोखिम सहन करने का कार्य – उत्पादन कार्य में सदैव कुछ-न-कुछ जोखिम अवश्य रहता है। उत्पादन के अन्य उपादानों को प्रत्येक दशा में अपना पारिश्रमिक चाहिए। उनका किसी प्रकार की हानि से कोई सम्बन्ध नहीं होता है। अत: व्यवसाय से सम्बन्धित सभी जोखिम उद्यमी को सहन करने पड़ते हैं।

उद्यमी (साहसी) के गुण

साहसी अथवा उद्यमी के प्रमुख गुण निम्नवत् हैं-

  1. उसे दूरदर्शी एवं उत्साही होना चाहिए।
  2. उसमें मनुष्य के स्वभाव, रुचि एवं योग्यता को परखने की क्षमता होनी चाहिए।
  3. उसमें तुरन्त एवं सही निर्णय लेने की योग्यता होनी चाहिए।
  4. उसमें आत्मविश्वास और साहस होना चाहिए।
  5. उसे पर्याप्त व्यावसायिक अनुभव एवं ज्ञान होना चाहिए।
  6. उसे अपने उद्योग से सम्बन्धित होने वाले नित नये आविष्कारों का ज्ञान होना चाहिए।
  7. उसे कुशल प्रशासक होना चाहिए अर्थात् व्यवसाय के प्रशासन में उसे उदार, निष्पक्ष एवं ईमानदार होना चाहिए।


Discussion

No Comment Found