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ROII No.MIVSU alasखंड 'क'नम्नलिखित गद्यांश ध्यानपूर्वक पढकर पूछे गए प्रनों के उत्तर अपने शब्दों में लिखिए। [1]जब कोई युवा अपने घर से बाहर निकलकर बाहरी संसार में अपनी स्थिति जमाता है, तब पहलीकठिनता उसे मित्र चुनने में पड़ती है। यदि उसकी स्थिति बिलकुल एकांत और निराली नहीं रहती है, तोउसकी जान-पहचान के लोग धड़ाधड़ बटते जाते हैं। थोड़े ही दिनों में कुछ लोगों से उसका मेल-जोल हो।जाता है। यही हेल-मेल बढते-बढ़ते मित्रता के रूप में परिणत हो जाता है | मित्रों के चुनाव की उपयुक्ततापर उसके जीवन की सफलता निर्भर हो जाती है, क्योंकि संगति का बड़ा भारी गुत प्रभाव हमारे आचरण परपड़ता है। हम ऐसे समय में समाज में प्रवेश करके अपना कार्य आरंभ करते हैं, जबकि हमारा चित्त कामल।आर हर तरह का संस्कार ग्रहण करने योग्य रहता है । हमारे भाव अपरिमार्जित और हमारा प्रपातअपरिपक्व रहती है। हम लोग कच्ची मिटटी की मूर्ति के समान रहते हैं. जिसे जो जिस रूप में चाह, सरूप में टाले: चाहे राक्षस बनाए, चाहे देवता |ऐसे लोगों के साथ काम करना हमारे लिए बरा है, जो हमसे अधिक दृढ संकल्प के हैं, क्योंकि हम 274हर बात बिना विरोध के मान लेनी पड़ती है | पर ऐसे लोगों का साथ करना और भी बुरा है, जो हमाराबात को ऊपर रखते हैं, क्योंकि ऐसी दशा में न तो हमारे ऊपर कोई नियंत्रण रहता है और न हमार लिए।कोई सहारा रहता है | कैसे आश्चर्य की बात है कि लोग एक घोडा लेते हैं तो उसके सौ गुण-दोष परखकरलेते हैं, पर किसी को मित्र बनाने में उसके पूर्व आचरण और स्वभाव आदि का कुछ भी विचार जारअनुसंधान नहीं करते | वे उसमें सब बातें अच्छी ही अच्छी मानकर अपना पूरा विश्वास जमा देत ह ।(क) कैसे लोगों को जल्दी मित्र मिलते हैं ? उनको मित्र कैसे मिलते हैं ? उपर्युक्त गद्यांश के आधार परस्पष्ट कीजिए।(ख) बाहरी संसार में मित्र चुनने में कठिनाई क्यों होती है ?(2)(ग) किन लोगों का साथ हमारे लिए बुरा है और क्यों ?(घ) हम लोग कच्ची मिटटी की मति के समान रहते हैं। इस कथन से लेखक का क्या मप्राय ह ? |स्पष्ट कीजिए।(ड) हम लोग कच्ची मिटटी की मूर्ति के समान रहते हैं। इस कथन से लेखक का क्या अभिप्राय है ?___स्पष्ट कीजिए इस गोश से जापको क्या सीखमलती (1)च) गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।(2)(2) |
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Answer» ŕvbntccbbbvbhhjmmnýbghk |
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