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राराला२ पानाआजु हरि अद्भुत रास उपायो।एकहिं सुर सब मोहित, कीन्हे, मुरली नाद सुनायौ।।अचल चले, थकित भए, सब मुनिजन ध्यान भुलायो।चंचल पवन थक्यौ नहिं डोलत, जमुना उलटि बहायो।।थकित भयौ चंद्रमा सहित-मृग, सुधा-समुद्र बढ़ायौ।335सूर स्याम गोपिनि सुखदायक, लायक दरस दिखायौ।।8।। |
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Answer» Hsjejejej Ejjeje |
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