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Answer» पुरस्कार का अर्थ एवं परिभाषा सीखने की प्रक्रिया में पुरस्कार और दण्ड का विशेष महत्त्व है। अच्छा कार्य करने पर पुरस्कार और बुरा कार्य करने पर दण्ड मिलना एक स्वाभाविक बात है। पुरस्कार एक सुखद अनुभव के रूप में प्राप्त होता है, जो कि अच्छे कार्य करने पर व्यक्ति को प्राप्त होता है। किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा भी किसी। व्यक्ति को अच्छे कार्य करने के उपलक्ष्य में पुरस्कार प्रदान किया जाता है। लेकिन शिक्षा में पुरस्कार का महत्त्व मुख्यतया अनुशासन स्थापित करने में है। वास्तव में पुरस्कार अच्छे कार्यों की प्रेरणा देते हैं, जबकि दण्ड बुरे कार्यों को करने से रोकते हैं। पुरस्कार का अर्थ बालक को अच्छे कार्यों को करने के फलस्वरूप सुखद अनुभूति कराने से है। अच्छे कार्यों को करने से बालक को उल्लास तथा आनन्द की अनुभूति होती है और वह पुनः श्रेष्ठ कार्यों को करने के लिए उत्साहित तथा प्रेरित होता है। पुरस्कार-प्राप्ति की आकाँक्षा से ही बालक श्रेष्ठ कार्य करने के लिए तत्पर हो जाता है और अपनी क्षमताओं का अभूतपूर्व प्रदर्शन भी करता है। इस प्रकार पुरस्कार एक प्रेरणादायक सथा लाभकारी प्रेरक का कार्य करती है। पुरस्कार की कुछ परिभाषाएँ इस प्रकार हैं ⦁ सेवर्ड (Seward) के अनुसार, “पुरस्कार व्यवहार पर अनुकूल प्रभाव डालने के लिए सम्बन्धित कार्य के साथ सुखद स्मृति का संयोजन करना है।” ⦁ हरलॉक (Harlock) के अनुसार, “पुरस्कार वांछित कार्य के साथ सुखद साहचर्य स्थापित करने का साधन है।” ⦁ रायबर्न (Ryburn) के अनुसार, “पुरस्कार बालक में सर्वोत्तम कार्य करने की भावना जाग्रत करता है।” उपर्युक्त वर्णित परिभाषाओं द्वारा ‘पुरस्कार’ का अर्थ स्पष्ट हो जाता है। वास्तव में पुरस्कार एक साधन है जो सम्बन्धित व्यक्ति को अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित करने हेतु इस्तेमाल किया जाता है। पुरस्कार के प्रकार पुरस्कार के अनेक रूप या प्रकार हैं। कुछ प्रमुख प्रकारों का विवरण निम्नलिखित है 1. आदर या सम्मान : जब कोई बालक, अध्ययन, खेलकूद, अनुशासन आदि के क्षेत्र में विशेष योग्यता का प्रदर्शन केरता है, तो उसे छात्रों, अध्यापकों और विद्यालय की ओर से सम्मानित किया जाता ‘ है। उदाहरण के लिए, यदि विद्यालय का कोई छात्र बोर्ड की परीक्षा में प्रदेश भर में प्रथम स्थान प्राप्त करता। है, तो विद्यालय की ओर से उसे सम्मानित किया जाता है। इस प्रकार से दिये जाने वाले पुरस्कार को उच्च कोटि का पुरस्कार माना जाता है। 2. प्रशंसा : यदि कोई बालक पढ़ने-लिखने, खेलकूद, नाटक आदि में विशेष योग्यता प्रदर्शित करता हो तो विद्यालय के सभी छात्रों के समक्ष उसकी प्रशंसा की जाती है और उसे गौरवान्वित किया जाता है। इस प्रकार की प्रशंसा से बालक की आत्मसन्तुष्टि होती है और उसका उत्साहवर्धन होता है। प्रशंसा “पाने के लिए वह पहले से भी अधिक उत्तम कार्य करने के लिए प्रोत्साहित होता है। 3. छात्रवृत्ति : यदि कोई बालक अपनी कक्षा में निरन्तर विशिष्ट सफलता प्राप्त करता है और सदैव : *प्रथम स्थान प्राप्त करता है, तो उसे प्रतिमाह छात्रवृत्ति के रूप में एक निश्चित धनराशि प्रदान की जाती हैं। छात्रवृत्ति से छात्र को परिश्रम करने की सशक्त प्रेरणा मिलती है और उसका उत्साहवर्धन भी होता है। 4. सुविधाएँ : कक्षा में पढ़ाई-लिखाई तथा विद्यालय में खेलकूद में अग्रणी रहने वाले बालक को कुछ विशेष सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं। विद्यालय शुल्क में छूट, छात्रावास में नि:शुल्क रहने की सुविधा, पुस्तकों की नि:शुल्क व्यवस्था आदि सुविधाएँ प्रतिभावान बालकों को प्रत्येक विद्यालय में प्राप्त होती हैं। इन सुविधाओं से बालकों को निरन्तरआगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त होती है। 5. प्रमाण-पत्र : विद्यालयों में विभिन्न योग्यताओं के प्रदर्शन के उपलक्ष में छात्रों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किये जाते हैं। इन प्रमाण-पत्रों से भी छात्रों को अच्छे कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। 6. प्रगति-पत्र पर अंकन : छात्रों के प्रगति-पत्र पर उनकी विशिष्ट योग्यताओं से सम्बन्धित अंकन भी किये जाते हैं; जैसे परीक्षा में प्रथम श्रेणी या अनुशासन प्रिय छात्रों को ‘ए’ श्रेणी से विभूषित किया जाता है। इन प्रगति-पत्रों से ही छात्रों की विशेषताओं का ज्ञान लोगों को हो जाता है। दूसरी ओर छात्र भी उन्हें लोगों को दिखाते में हर्ष तथा गर्व का अनुभव करते हैं। 7. पदक तथा तसगे या मैडल : शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्टता प्राप्त करने पर छात्रों को स्वर्ण, रजत, काँस्य आदि धातु के पदक व तमगे आदि प्रदान किये जाते हैं। 8. उपयोगी वस्तुएँ : कॉलेज के वार्षिकोत्सव के अवसर पर प्रत्येक विद्यालय में विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं। जो छात्र इन प्रतियोगिताओं में विजयी होते हैं, उन्हें पुस्तकें, बनियाने, घड़ी, कलम, हॉकी, जूते-मौजे आदि अनेक उपयोगी वस्तुएँ पुरस्कार के रूप में प्रदान की जाती हैं। इन वस्तुओं से भी छात्रों का उत्साहवर्धन होता है। 9. शील्ड और कप : खेल-कूद, वाद-विवाद तथा निबन्ध आदि की प्रतियोगिताओं में विजेताओं को व्यक्तिगत या सामूहिक दोनों रूपों में शील्ड या कप प्रदान किये जाते हैं; जैसे-फुटबॉल टूर्नामेण्ट के लिए निर्धारित विशेष कप। इनके अतिरिक्त विजेताओं को बहुत-सी अन्य वस्तुएँ भी पुरस्कार के रूप में प्रदान की जाती हैं। 10. सफलता : किसी कार्य में सफलता का मिलना ही एक बड़ा पुरस्कार होता है, क्योंकि सफलता से बालक की आत्म-सन्तुष्टि होती है तथा वह प्रगति-पथ पर बढ़ने के लिए प्रेरित तथा प्रोत्साहित होता है।
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