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पुराने समय में स्त्रियों द्वारा प्राकृत भाषा में बोलना क्या उनके अपढ़ होने का सबूत हैं- पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

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पुराने समय में स्त्रियों द्वारा प्राकृत भाषा में बोलना उनके अपढ़ होने का सबूत नहीं है, क्योंकि उस समय बोलचाल की भाषा प्राकृत ही थी। जिसे सुशिक्षितों द्वारा भी बोला जाता था। जिस प्रकार आज हिन्दी जन साधारण की भाषा है। वर्तमान समय में अखबारों की भाषा हिन्दी है। उच्च से उच्च पदवी धारण किए लोग समाचारपत्रों के सम्पादक हैं, उसी प्रकार उस समय प्राकृत बोलनेवाले भी अपद, गवार नहीं हो सकते इसका एकमात्र कारण है कि प्राकृत उस समय की सर्व-साधारण भाषा थी। प्राकृत भाषा में जैनों और बौद्धों के अनेक ग्रंथों की रचना हुई। तो स्त्रियों के द्वारा प्राकृत बोलना उनके अपढ़ होने का सबूत नहीं है।



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