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पर्यावरणीय संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।

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पर्यावरण का जिसमें मानव रह रहा है, अपने सभी जैवीय तथा अजैवीय घटकों के साथ समन्वित, समरस तथा सन्तुलित रहना आवश्यक है। वर्तमान में पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता तथा महत्त्व को अग्रलिखित प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है

⦁    इसके द्वारा पर्यावरणीय असन्तुलन की विनाशकारी प्रभावों से बचा जा सकता है।
⦁    पर्यावरण का हमारी शारीरिक संरचना, स्वास्थ्य तथा मन पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। प्राकृतिक संसाधन जितने स्वच्छ व निर्मल होंगे, हमारा शरीर और मन उतना ही स्वच्छ एवं निर्मल होगा, इसलिए गुरु चरक से कहा था—‘स्वस्थ जीवन के लिए शुद्ध वायु, जल और मिट्टी आवश्यक कारक हैं।”

⦁    राज्य की स्थिरता पर्यावरण की स्वच्छता पर निर्भर करती है।

⦁    जैवीय विकास में पर्यावरण एक महत्त्वपूर्ण घटक है।

⦁    देश के आर्थिक विकास के लिए पर्यावरण की सुरक्षा आवश्यक है।

⦁    औद्योगीकरण, नगरीकरण एवं प्रौद्योगिकी के प्रयोग ने प्रदूषण की गम्भीर समस्या को उत्पन्न कियाहै। जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, वायु प्रदूषण एवं ध्वनि प्रदूषण की समस्याओं ने मानव के अस्तित्व को ही चुनौती दे दी है।

⦁    रासायनिक एवं आणविक अपघटकों ने ओजोन की परत में छेद करके सम्पूर्ण विश्व को ही त्रस्त कर दिया है।
संक्षेप में, वर्तमान शताब्दी की सबसे महत्त्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है-पर्यावरण की सुरक्षा तथा साथ ही मनुष्य को शुद्ध जल, वायु और भोजन प्रदान करना।



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