1.

प्रवर्तक आर्थिक जगत के फरिश्ते हैं ।

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प्रवर्तक (Promoter) का कम्पनी की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि प्रवर्तक कम्पनी की स्थापना की पूर्व तैयारी से लगाकर कम्पनी का पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) हो तब तक की विधि अपने नाम से करता है, इस हेतु पूर्व-तैयारी, जाँच-पड़ताल, विशेषज्ञों से सलाह, धन्धे का प्रकार, लाभ की संभावना, धन्धे का स्थल, आवश्यक पूँजी, पूँजी के प्राप्ति-स्थान इत्यादि पर विचार करता है । इस हेतु आवश्यक सामग्री, जमीन, मकान, यंत्र-सामग्री, कच्चा माल, औजार, मजदूर इत्यादि प्राप्त करते हैं । आवश्यक दस्तावेज निष्णातों से तैयार करवाते हैं व कम्पनी का पंजीयन करवाते हैं । ये सब निजी जिम्मेदारी स्वीकार करके करते हैं । इस प्रकार प्रवर्तक कम्पनी की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते है, इसलिए प्रवर्तक आर्थिक जगत के फरिश्ते माने जाते हैं ।



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