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प्रस्तुत कहानी में प्रेमचंद ने गधे की किन स्वभावगत विशेषताओं के आधार पर उसके प्रति रूड़ अर्थ (मूर्ख) का प्रयोग न कर किस नए अर्थ की ओर संकेत किया है ?

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गधा सभी प्राणियों में सबसे सीधा जानवर है। उसके इसी सीधेपन के कारण उसे बुद्धिहीन समझा जाता है। उसके चेहरे पर कभी हर्ष और विषाद की रेखा नहीं आती, न कभी असंतोष की भावना। वह हर हाल में एक जैसा ही रहता है। गधे के इसी गुण के कारण लेखक ने रूढ़ अर्थ ‘मूर्ख’ का प्रयोग न कर ऋषिमुनियों के गुणों से उनकी तुलना करते हैं। जैसे ऋषिमुनि सुख-दुःख, हानि-लाभ किसी भी दशा वे एक सरीखे रहते हैं।

गधा भी कुछ इसी प्रकार का प्राणी होने के नाते लेखक ने उन्हें सर्वथा नवीन अर्थ में प्रयुक्त किया है। ऋषि-मुनियों के जितने गुण हैं वे सभी गुण उनमें पराकाष्ठा को पहुँच गये हैं। यों गधे में ऋषि-मुनियों के गुण के कारण उनकी तुलना लेखक ने ऋषि-मुनियों से की है जो अपने आप में सर्वथा नए अर्थ की ओर संकेत है।



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