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परशुरामजी का क्रोध शांत करने के लिए श्रीरामजी ने क्या कहा ?

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अपने प्रिय शिवधनुष को टूटा हुआ देखकर परशुरामजी के क्रोध की सीमा न रही। वे शिवधनुष तोड़नेवाले को अपना परम शत्रु मानकर उसे कठोर दंड देने के लिए तत्पर थे। उन्होंने श्रीराम से उसका नाम पूछा। श्रीराम ने कहा – आप इतने क्रोधित क्यों हो रहे हैं? शंकरजी का धनुष तोड़नेवाला आपका कोई दास ही होगा। आपका क्या आदेश है? आप मुझसे क्यों नहीं कहते? उस दास पर इतना क्रोध करने की क्या आवश्यकता?



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