1.

प्रसादोत्तर युग के हिन्दी नाटकों की प्रमुख विशेषता बताइए।

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प्रसादोत्तर नाटकों में भारतीय एवं पाश्चात्य शैली के तत्त्वों का एक साथ समावेश पाया जाता है। इन नाटकों में राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक समस्याओं का चित्रण हुआ है। इनकी विषय-वस्तु यथार्थवादी धरातल पर संरचित है।



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