1.

‘प्रेम-बेलि’ का रूपक समझाइए।

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मीरा ने प्रेम को एक लता का रूपक दिया है। यह लता साधारण लता नहीं है, प्रेम-लता है। अतः साधारण जल से नहीं आँसुओं से सिंची जाती है। अर्थात् प्रेम में अनेक कठिनाइयों को सहन करना पड़ता है। अनेक प्रकार का त्याग और बलिदान करना पड़ता है । विरह में तपना पड़ता है। तब जाकर वह लता पुष्पित, पल्लवित होती हैं।



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