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प्राचीन स्मारकों, पुरातत्त्वीय स्थलों और अवशेषों के स्थलों की सुरक्षा के कानूनों की जानकारी दीजिए ।

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भारतीय विरासत के सामने समय-समय पर जो जोखिमी और नुकसानदायक कारक उत्पन्न होते गये है वैसे ही विरासत की सुरक्षा के प्रत्यन बढ़ते गये है ।

  • पुरातत्त्वीय विरासत को सुरक्षित रखने के लिए संसद ने 1958 में प्राचीन स्मारकों, पुरातत्त्वीय स्थलों, ऐतिहासिक स्मारकों, पुरातत्त्व के अवशेषों’ संबंधित कानून बनाया । इसके अनुसार प्राचीन कलाकृतियों, धार्मिक स्थानों, ऐतिहासिक स्मारकों, पुरातत्त्व के स्थलों और अवशेषों की देखभाल की सूचना दी गयी है ।
  • पुरातत्त्व विभाग के कानून के अनुसार कोई भी निजी व्यक्ति, संस्था या एजेन्सी भारत सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना किसी भी स्थान की खुदाई (उत्खनन) नहीं कर सकती । इससे चौरी-छुपे होनेवाली खुदाई को रोकने का कार्य हुआ, जिससे वे आजतक सुरक्षित रहे है ।
  • केन्द्र सरकार ने महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों ‘राष्ट्रीय स्मारकों’ के रुप में घोषित किया है । उनकी देखरेख की जिम्मेदारी पुरातत्त्व विभाग को सौंपी गयी है ।
  • मात्र सरकार द्वारा कानून बनाने से नहीं; परंतु लोगों की नैतिक जवाबदारी से विरासत की सुरक्षा करनी चाहिए ।
  • पुरातत्त्व विभाग नष्ट हुए या नष्ट होने की तैयारी में हो ऐसे स्मारकों, स्थलों का निश्चित पद्धति से देखरेख करवाता है ।
  • स्मारकों की मरम्मत करते समय अनेक बातें ध्यान में रखनी चाहिए जैसे कि उनका मूल स्वरूप, आकार, कद तथा असलियत बनी रहें यह जरूरी है ।
  • भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण नामक सरकारी विभाग अपनी देखरेख के अधीन लगभग 500 इमारतों और स्थानों के संरक्षण का कार्य करता है ।
  • आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी पर नागार्जुन सागर बहुउद्देशीय योजना के कारण संगमेश्वर मंदिर, पापनाशम् मंदिर समुद्री पानी में डूब गये थे । पुरातत्त्व विभाग ने इन मंदिरों को आंध्रप्रदेश के महबूब नगर जिले के आलमपुर विभाग में सफलतापूर्वक ख्रिसकाकर स्थानांतरित किया ।
  • विश्व के सात आश्चर्यों में से एक आगरा का ताजमहल मथुरा की रिफाईनरी और उद्योगों के कारण वायु प्रदूषण के परिणाम स्वरूप उसका सफेद संगमरमर फीका और पीला पड़ रहा था । पुरातत्त्व विभाग द्वारा वायु प्रदूषण फैलानेवाले उद्योगों को बंद करवाकर ताजमहल की नियमित सफाई करवाने के उचित कदम उठाए हैं और ताजमहल की चमक बचाई है ।


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