महाराजा रणजीत सिंह का शासन स्वेच्छाचारिता पर आधारित था। इस शासन को चलाने के लिए महाराजा रणजीत सिंह जैसे योग्य व्यक्ति की ही आवश्यकता थी। अतः महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु के पश्चात् इस राज्य को कोई भी न सम्भाल सका।
महाराजा रणजीत सिंह की दुर्बल नीति के परिणामस्वरूप अंग्रेजों का साहस बढ़ता चला गया। धीरे-धीरे अंग्रेज़ पंजाब की स्थिति को पूरी तरह समझ गए और अन्ततः उन्होंने पंजाब पर अधिकार कर लिया।
महाराजा रणजीत सिंह का शासन शक्तिशाली सेना पर आधारित था। उसकी मृत्यु के पश्चात् यह सेना राज्य की वास्तविक शक्ति बन बैठी। अतः सिक्ख सरदारों ने इस सेना को समाप्त करने के अनेक प्रयास किए।
पहले तथा दूसरे सिक्ख युद्ध में ऐसे अनेक अवसर आये जब अंग्रेज़ पराजित होने वाले थे, परन्तु अपने ही साथियों के कारण सिक्खों को पराजय का मुंह देखना पड़ा।