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फकीरी अपने आसन से कब गिर जाती है? उसकी रक्षा कैसे हो सकती है?

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मजदूरी तथा फकीरी मनुष्य के विकास के लिए अत्यन्त आवश्यक हैं। बिना मजदूरी किए फकीरी का उच्च भाव शिथिल हो जाता है। फकीरी अपने आसन से गिर जाती है। श्रमशीलता से विमुख होने पर फकीरी में ताजगी तथा नवीनता नहीं रहती। वह बासी हो जाती है। उसके आदर्श पतित हो जाते हैं। फकीरी की मौलिकता बनाए रखने तथा उसकी श्रेष्ठता की रक्षा के लिए उसका श्रम से जुड़ा रहना जरूरी है।



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