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पद्मासन निष्प्रयोज्य क्यों सिद्ध हो चुके हैं? ईश्वर किन आसनों से प्राप्त हो सकता है?

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मजदूरी अर्थात् शारीरिक श्रम के अभाव में मानसिक चिन्तन बेकार रहता है। श्रम के अभाव में धामिक क्रियाएँ तथा कला- कौशल अधूरे हैं। पद्मासन करने से ईश्वर प्राप्त नहीं होता। खेत जोतने, बोने, फसल काटने तथा मजदूरी करने में शरीर की जो मुद्राएँ बनती हैं, ईश्वर का साक्षात्कार उन्हीं से हो सकता है। लकड़ी का काम करने वाले बढ़ई, ईंट-पत्थर का काम करने वाले मिस्त्री और संतराश, लुहार, किसान आदि कवि, योगी, महात्मा आदि के समान ही श्रेष्ठ मनुष्य होते हैं। इनके श्रम-रूपी आसन ही ईश्वर-प्राप्ति करा सकते हैं।



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