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‘पड़ोस-कल्चर’ के बारे में लेखिका क्या कहती हैं?

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‘पड़ोस कल्चर’ के बारे में लेखिका मन्नू भंडारी कहती हैं कि उस जमाने में घर की दीवारें घर तक ही समाप्त नहीं हो जाती थीं बल्कि पूरे मोहल्ले तक फैली रहती थीं। इसलिए मोहल्ले के किसी भी घर में जाने पर कोई पाबंदी नहीं थी, बल्कि कुछ घर तो परिवार का हिस्सा ही थे। लेकिन आज आधुनिक दबाव ने महानगरों के फ्लैट में रहने वालों को हमारे इस परंपरागत ‘पडोस-कल्चर’ से विच्छिन्न करके हमें संकुचित, असहाय और असुरक्षित बना दिया है।



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