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पाठ के आधार पर सालिम अली की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

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सालिम अली की चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :

  • पक्षी-प्रेमी : सालिम अली पक्षी प्रेमी थे। वे पक्षियों की खोज में लम्बी-लम्बी यात्राएँ करते थे और ढेरों जानकारियाँ रखते थे। बचपन में एयरगन से एक नीले कंठवाली गौरेया घायल हो कर गिर पड़ी थी। इसी घटना ने उन्हें पक्षियों के विषय में जानकारी एकत्रित करने को प्रेरित किया।
  • प्रकृति प्रेमी : सालिम अली प्रकृति प्रेमी थे। वे प्रकृति के प्रभाव में आने के बजाय प्रकृति को अपने प्रभाव में लाने के कायल थे। उनके लिए प्रकृति में हर तरफ एक हँसती-खेलती रहस्यभरी दुनिया पसरी थी। यह दुनिया उन्होंने बड़ी मेहनत से गढ़ी थी।
  • पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति चिंतित : प्रकृति के सांनिध्य में रहनेवाले सालिम अली प्रकृति से बेहद प्रेम करते थे और संभवित खतरों से बचाने के लिए भरसक प्रयास करते थे। केरल के साइलेंट वेली को रेगिस्तान की गर्म हवाओं से बचाने के लिए वे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह से भी मिले थे।
  • अनोखा व्यक्तित्व : सालिम अली करीब सौ वर्ष के थे। लम्बी यात्राओं की थकान से उनका शरीर दुर्बल हो गया था। इसके बावजूद पक्षियों की तलाश करने के लिए अपनी आँखों से दूरबीन नहीं उतारा। उनके आँखों की रोशनी में तनिक भी कमी नहीं आई थी। ये खुले विचारों के सीधे-सादे व्यक्ति थे। उनका पूरा व्यक्तित्व प्रकृति का प्रतिसप बन गया था।
  • ‘बर्ड वाचर’ : सालिम अली बर्ड वाचर थे। वे सदैव अपनी आँखों पर लगा दूरबीन उनकी मौत के बाद ही उतरा।


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