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पारंपरिक विचारधाराओं के बारे में विस्तार से समझाइए । |
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Answer» पारंपरिक विचारधाराएँ Thought of Classical Theory : संचालन की विचारधाराओं में 19वी शताब्दी के अन्त तक में जो विचारधाराएँ प्रस्तुत हुई वह विचारधाराएँ पारंपरिक विचारधारा के रूप में पहचानी जाती है । इस विचारधारा के मुख्य प्रणेता संचालनशास्त्री फ्रेडरिक टेलर, मेक्स वेबर, गील बर्थ, हेनरी गेन्ट और हेनरी फेयोल है । पारंपरिक विचारधारा में टेलर का बहुत बड़ा योगदान है । फेडरिक टेलर द्वारा प्रस्तुत वैज्ञानिक संचालन के सिद्धांत संचालन विचारधारा में आज भी प्रस्तुत है । वैज्ञानिक संचालन का अभिगम रूढ़िगत पद्धतियों के बदले में समय निरीक्षण और गति निरीक्षण द्वारा वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत हुए सिद्धांतो को अपनाने की सिफारिश करते है । वैज्ञानिक संचालन के सिद्धांत का मुख्य योगदान व्यवस्थातंत्र में विशिष्टीकरण, उत्तेजित वेतन प्रथा, जिम्मेदारी तथा कार्य की वैज्ञानिक ढंग से वितरण होता है । पारंपरिक विचारधारा में हेनरी फेयोल का योगदान भी महत्त्वपूर्ण रहा है । उन्होंने संचालन के सामान्य सिद्धांत देकर संचालन विचारधारा में महत्त्व का योगदान दिया । उसने धन्धाकीय इकाई में विविध कार्यों के स्तर निश्चित करके, कार्यों की मर्यादा निश्चित करने का प्रयत्न किया । विभिन्न स्तर पर संचालकीय जिम्मेदारी निभाने के लिए संचालन के सार्वत्रिक सिद्धांत मार्गदर्शक के रूप में दिये है । इसके अलावा पारंपरिक विचारधारा में मेक्स वेबर के अमलदारशाही के विचार का भी योगदान रहा है । 19वीं शताब्दी के अन्त तक औद्योगिक क्रान्ति के परिणाम स्वरूप धन्धाकीय इकाईयों का स्वरूप और कद बदलने लगे । जिसके परिणामस्वरूप पारंपरिक विचारधारा की अनेक मर्यादाओं के कारण उसमें परिवर्तन करने की आवश्यकता उत्पन्न हुई । इनकी मर्यादाओं में मुख्यरूप से वित्तीय उत्तेजन को अधिक स्थान, मानवीय अभिगम को कम महत्त्व तथा अनौपचारिक सम्बन्धों की अवगणना मुख्य हैं । |
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