1.

P-5ख्वाबो को अक्सर मैने टूटते हुए देखाशब्दों की माला को मैने कविताओ में बदलते देखाआकाश में उड़ते परिंदों को मैने अक्सरहवाओ से बाते करते देखाशीशे के बने महलो को मैनेताश के पत्तो की तरह बिखरते देखासाँसों की लड़ियों को मैनेपल भर में टूटते हुए देखाकाली रातो को मैने अक्सरएक सुनहरी सुबह में बदलते देखा....!!!​

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