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नव्यकरणीय और अनव्यकरणीय संसाधनों से क्यो आशय है?

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(1) नव्यकरणीय संसाधन– इसमें वे संसाधन सम्मिलित हैं जिनमें प्रकृति में अल्प समय में ही पुन: चक्रण द्वारा स्थापित होने का गुण होता है। इनके उदाहरण जल, काष्ठ, मृदा, खाद्यान्न फसलें आदि हैं।

(2) अनव्यकरणीय संसाधन– ये संसाधन समाप्त हो जाने पर पुनः स्थापित नहीं किए जा सकते हैं। इनका प्रमुख उदाहरण जीवाश्मीय ईंधन व खनिज पदार्थ हैं। परन्तु आजकल विश्व में अत्यधिक उपयोग तथा अव्यवस्थित प्रबन्धन के कारण वन्य-जीव (पादप तथा जन्तु) भी अनव्यकरणीय संसाधन बनते जा रहे हैं।



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