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निवारक निरोध से क्या तात्पर्य है? निवारक निरोध का महत्त्व लिखिए। |
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Answer» निवारक निरोध अनुच्छेद 22 के खण्ड 4 में निवारक निरोध (Preventive Detention) का उल्लेख किया गया है। निवारक निरोध का तात्पर्य वास्तव में किसी प्रकार का अपराध किए जाने के पूर्व और बिना किसी प्रकार की न्यायिक प्रक्रिया के ही किसी को नजरबन्द करना है। निवारक निरोध के अन्तर्गत किसी व्यक्ति को तीन माह तक नजरबन्द रखा जा सकता है। इससे अधिक यह अवधि परामर्शदात्री परिषद् की सिफारिश पर बढ़ाई जा सकती है। निवारक निरोध अधिनियम, 1947 ई० में पारित किया गया था। समय-समय पर इसकी अवधि बढ़ाई जाती रही और वह 1969 ई० तक चलता रहा। 1971 ई० में इसका स्थान ‘आन्तरिक सुरक्षा अधिनियम’ (Maintenance of Internal Security Act, 1971) ने ले लिया। इस कानून को बोलचाल की भाषा में ‘मीसा’ (MISA) के नाम से जाना जाता है। इसके पश्चात् 1981 ई० में इसके स्थान पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून’ (National Security Act) पारित किया गया। तत्पश्चात् टाडा कानून’ (Terrorist and Disruptive Activities Act) लागू किया गया। वर्तमान में यह भी समाप्त कर दिया गया है और इसके स्थान पर पोटा (Prevention of Terrorist Act) का निर्माण किया गया है। अब इसे भी संशोधित करने की प्रक्रिया चल रही है। निवारक निरोध कानून की आलोचना और उसका महत्त्व स्वतन्त्रता के अधिकार पर लगे प्रतिबन्धों को देखकर अनेक विद्वानों ने इसकी आलोचना की है। निवारक निरोध कानून के विषय में टेकचन्द बख्शी ने कहा था कि यह दमन तथा निरंकुशता का पत्र है। इसी प्रकार सोमनाथ लाहिड़ी ने इसकी आलोचना करते हुए कहा था, “मूल अधिकारों का निर्माण पुलिस के सिपाही के दृष्टिकोण से किया गया है, स्वतन्त्रता के लिए संघर्ष करने वाले राष्ट्र के दृष्टिकोण से नहीं।” परन्तु निवारक निरोध अथवा मीसा की आलोचना के बावजूद भी इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि वर्तमान परिस्थितियों में यह व्यवस्था कुछ सीमा तक आवश्यक और उपयोगी है। न्यायमूर्ति पतंजलि शास्त्री के अनुसार, “इस भयावह उपकरण की व्यवस्था ……………. उन समाज-विरोधी और विध्वंसकारी तत्त्वों के विरुद्ध की गई है, जिनसे नवविकसित प्रजातन्त्र के राष्ट्रीय हितों को खतरा है।” वस्तुत: निवारक निरोध की व्यवस्था एक ‘भरी हुई बन्दूक’ के समान है और उसका प्रयोग बहुत सावधानी से तथा विवेकपूर्ण ही किया जाना चाहिए। |
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