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निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए नव में उगाई लो रंगभरी रेखा पर एडीसी जिसको मैंने धनुष कहते हैं उमड़ घुमड़ कर अभी बादल में बरसते हैं महक उठी धरती और फूल पत्ती पौधे सर से |
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