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निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए :गुरु-सा मतिमान,पवन-सा तू गतिमान,तेरी नभ से भीऊँची उड़ान है रे । |
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Answer» मनुष्य के पास बुद्धि की कमी नहीं है। उसके पास बृहस्पति जैसी प्रतिभा है। वह वायु जैसी गति रखता है। वह चाहे तो आकाश से भी ऊँचा उठ सकता है। कवि कहना चाहता है कि यदि मनुष्य अपने अंदर छिपी शक्तियों को जाग्रत कर ले तो उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। |
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