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निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।246-12हमारे चारों ओर शान से पसरी प्रकृति कितनी सफा, संपन्न और भव्य है । क्या हमने अपनी व्यस्त जीवनचर्यासे समय निकाल कर, कभी इस पर गौर किया । बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर, इन छह बातुओं कीअलग अलग छटा, अलग अलग मिजाज अपने में समाए प्रकृति नाना मनोहर रूपों में हमारे सामने आती है, तोहर बार हम निशब्द हुए उसे निहारते रह जाते हैं । हर मौसम का अपना मिजान, अपना अंदाज, अपनी खुशबू,अपना स्पर्श होता है, जो हमें तरह तरह की भावनाओं, अनुभूतियों से भरकर हमारे अनुभव जगत का विस्तारकरता है।बसंत, प्रीष्म, वर्षा, शरय, आदि प्रातुओं का एक के बाद एक आना और जाना, प्रकृति को अपने रंग मेंरंगना, कभी उसे फूलों से आवृत कर खिलखिलाहट से भर देना, कमी भीनी महक से लपेट देना, तो कमी फूल.पत्ते उड़ाकर वैरागिन सी उदास बना देना, कभी झर झर पानी बरसाकर तर कर देना, कभी सर्द झाकों से सिहरादेना, ... कितने प्यारे, अनोखे व अनूठे रूप है । प्रकृति का सौम्य रूप, रौद्र रूप, उसकी चंचलता, उसकीजाता, उसकी जीवंतता आदि सब देखने वाले की नज़र पर, उसकी संवेदनशीलता पर निर्भर होते हैं।मैंने महसूस किया है कि हर मौसम का मानव मन पर एक मनोवैज्ञानिक असर होता है । जैसे ग्रीष्म केअलसाए दिन लंबे होने के कारण, ठंडे बंद कमरों में लेटे दिलो-दिमाग को आत्मचिंतन का खूब समय देते हैं ।मधुमास हमारी रागात्मक प्रवृत्ति को तराश देता है... हमें तरह-तरह से रचनात्मक बनाता है।सूरज और चंद्रमा का अस्त और उदय इस लोक को क्रमश: दुख और सुख की दो दशाओं में नियमितकरता है । दोनों में से एक भी दशा स्थायी नहीं है, अत: हमें न सुख में अधिक सुखी और न दुख में अधिक दुखीहोना चाहिए, बल्कि तटस्थ भाव से जीना चाहिए ।(क) प्रकृति के रूपों का हम पर क्या प्रभाव पड़ता है ?(ख) प्रकृति के किन्हीं दो अनूठे रूपों की चर्चा कीजिए जो आपको अधिक प्रभावित करते हाँ ।(ग) गद्यांश में ग्रीष्म के कैसे प्रभाव से लेखक प्रभावित होता है ?(घ) मधुमास किसे कहते हैं ? उसका मन पर कैसा प्रभाव पड़ता है ?(छ) सूर्य और चंद्रमा से हमें क्या संदेश मिलता है ?(च) आशय स्पष्ट कीजिए:"हर बार हम नि शब्द हुए उसे निहारते रह जाते हैं।"4/2/1for free world ​

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