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निम्नलिखित दोहों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए :सोना सज्जन साधु जन, टूटि जुरै सौ बार ।दुर्जन कुंभ कुम्हार के, एकै धका दरार ॥

Answer»

सोना, सज्जन और साधु लोग रुठने पर भी बार-बार जुड़ते रहते हैं। सज्जन अच्छे लोगों से संबंध बनाकर उसे कायम रखते हैं। जबकि दुर्जन लोगों का व्यवहार इससे उलटा है। जैसे जरा-सी दरारवाले मटके को थोड़ा धक्का मारने पर फूट जाता है, ठीक उसी तरह दुर्जन व्यक्ति टूटते हुए संबंध को पूरी तरह तोड़ देने में संकोच नहीं करते। (यहाँ कबीर ने सजन और दुर्जन के स्वभाव का अंतर बताया है। सज्जन जोड़ने और दुर्जन तोड़ने की बुद्धि रखता है।)



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