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निम्नांकित गद्यांशों में रेखांकित अंशों की सन्दर्भ सहित व्याख्या और तथ्यपरक प्रश्नों के उत्तर दीजिये-सच तो यह है कि सिर्फ बर्फ को बहुत निकट से देख पाने के लिए ही हम लोग कौसानी गये थे। नैनीताल से रानीखेत और रानीखेत से मझकाली के भयानक मोड़ों को पार करते हुए कोसी । कोसी से एक सड़क अल्मोड़ा चली जाती है, दूसरी कौसानी। कितना कष्टप्रद, कितना सूखी और कितना कुरूप है वह रास्ता । पानी का कहीं नाम-निशान नहीं, सूखे भूरे पहाड़, हरियाली का नाम नहीं । ढालों को काटकर बनाये हुए टेढ़े-मेढ़े खेतं, जो थोड़े से हों तो शायद अच्छे भी लगें, पर उनको एकरस सिलसिला बिल्कुल शैतान की आँत मालूम पड़ता है।(1) उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।(2) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।(3) बर्फ को पास से देखने के लिये लेखक कहाँ गया? |
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Answer» 1.सन्दर्भ- प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी गद्य’ में धर्मवीर भारती द्वारा लिखित ‘ठेले परे हिमालय’ से लिया गया है। लेखक बर्फ को निकट से देखने के लिए कौसानी जाता है। वह रास्ते में पड़े मुख्य दृश्यों का वर्णन करता है। 2.रेखांकित अंशों की व्याख्या- लेखक बताता है कि कौसानी जाने के लिए नैनीताल से रानीखेत जाना पड़ता है। और रानीखेत से मझकाली के दुर्गम मोड़ों को पार करते हुए एक रास्ता कोसी जाता है। कोसी से एक सड़क अल्मोड़ा को जाती है और दूसरी सड़क कौसानी को जाती है। यह मार्ग अत्यन्त कष्टप्रद और दुर्गम है। मार्ग में पानी कहीं नहीं दिखायी पड़ता है। सूखे-सूखे पहाड़ दिखायी पड़ते हैं। हरे-भरे दृश्य देखने को मन तरस जाता है। ढालों को काटकर टेढ़े-मेढ़े खेत तैयार किये जाते हैं, जो देखने में अच्छे नहीं लगते हैं। 3.बर्फ को पास से देखने के लिये लेखक कौसानी गया। |
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