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निबन्ध:हमारा राष्ट्रीय पर्व : स्वतन्त्रता दिवस

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प्रस्तावना–भारतवर्ष में जिस प्रकार सामाजिक और धार्मिक पर्व (त्योहार) बहुत धूमधाम से मनाये जाते हैं, उसी प्रकार यहाँ राष्ट्रीय पर्वो को भी विशेष महत्त्व है। स्वतन्त्रता दिवस एक राष्ट्रीय पर्व है, जिसे प्रतिवर्ष 15 अगस्त को सम्पूर्ण भारत में बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों के द्वारा बड़ी धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह हमारे लिए एक महत्त्वपूर्ण दिन है। इस दिन हमारा देश सैकड़ों वर्षों की विदेशी दासता से मुक्त हुआ था।  हम सब इस दिन को एक ऐतिहासिक दिन के रूप में मनाते हैं। स्वतन्त्रता के पुनीत पर्व पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपनी स्वतन्त्रता को अमर बनाये रखेंगे और स्वतन्त्रतासेनानियों के अधूरे स्वप्नों को साकार कर दिखाएँगे। कृतज्ञ राष्ट्र की उन अमर शहीदों को यही सर्वश्रेष्ठ श्रद्धांजलि होगी।

स्वतन्त्रता दिवस का महत्त्व-स्वतन्त्रता दिवस का हम सबके लिए बहुत महत्त्व है; क्योंकि देश को स्वतन्त्र कराने के लिए हमारे देश के न जाने कितने वीर जवानों ने अपने प्राणों की बलि दी है, कितनी माताओं ने अपने होनहार पुत्रों को खोया है, कितनी बहनों के भाई उनसे बिछुड़ गये, कितनी सुहागिनों की माँगें सूनी हो गयीं। अनेक नेताओं ने स्वतन्त्रता प्राप्त करने के लिए वर्षों जेलों की यातनाएँ भोगी हैं। वे अंग्रेजों द्वारा दी गयी यातनाओं से डिगे नहीं, वरन् जी-जान से अपनी कोशिश में जुटे रहे। उन्होंने स्वतन्त्रता प्राप्ति के लिए भारतीय जनता को उत्साहित किया। कहने का तात्पर्य यह है कि कड़ी मेहनत और बलिदानों के बाद हमारा देश स्वतन्त्र हो सका है। जो वस्तु जितनी अधिक मेहनत और बलिदानों से प्राप्त की जाती है, उसका महत्त्व उतना ही अधिक बढ़ जाता है।

विभिन्न समारोह मनाये जाने के कारण–स्वतन्त्रता दिवस के दिन हम विभिन्न समारोहों का आयोजन करके उन शहीदों की याद को तरोताजा करते हैं, जिन्होंने देश की स्वतन्त्रता के लिए अपने प्राणों की बलि दे दी और अमर हो गये। उनकी याद प्रत्येक भारतवासी को देश के लिए निछावर हो जाने की प्रेरणा देती है। इन समारोहों से देश के भावी कर्णधारों के हृदय में राष्ट्रभक्ति के बीज अंकुरित हो जाते हैं तथा जनजन के मन में राष्ट्रभक्ति की भावनाएँ उद्वेलित हो जाती हैं। साथ ही सैकड़ों वर्षों की दासता से मुक्ति मिलने के कारण इस दिन को याद रखना और उत्सव मनाना एक स्वाभाविक बात हो जाती है।

राष्ट्रीय, प्रान्तीय और स्थानीय स्तरों पर कार्यक्रमों का आयोजन-खुशी के कारण ही स्वतन्त्रता दिवस सभी स्तरों-राष्ट्रीय, प्रान्तीय और स्थानीय–पर बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिवस की पूर्व सन्ध्या पर राष्ट्रपति राष्ट्र के नाम अपना सन्देश प्रसारित करते हैं। दिल्ली के लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने से पहले प्रधानमन्त्री सेना की तीनों टुकड़ियों, अन्य सुरक्षा बलों, स्काउटों आदि का निरीक्षण कर सलामी लेते हैं। फिर लाल किले के मुख्य द्वार पर पहुँचकर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर उसे सलामी देते हैं तथा राष्ट्र को सम्बोधित करते हैं। इस सम्बोधन में पिछले वर्ष सरकार द्वारा किये गये कार्यों का लेखाजोखा, अनेक नवीन योजनाओं तथा देश-विदेश से सम्बन्ध रखने वाली नीतियों के बारे में उद्घोषणा की जाती है। अन्त में राष्ट्रीय गान के साथ यह मुख्य समारोह समाप्त हो जाता है। रात्रि में दीपों की जगमगाहट से विशेषकर संसद भवन व राष्ट्रपति भवन की सजावट देखते ही बनती है। राज्यों की राजधानी में भी यह उत्सव बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है। राज्यों के मुख्यमन्त्री प्रदेश की जनता को  सम्बोधित कर उसे प्रदेश की प्रगति की योजनाओं से अवगत कराते हैं। छोटे-बड़े सभी नगरों में इस अवसर पर अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, जिनमें ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और उत्साहवर्द्धक भाषण होते हैं। सर्वत्र प्रभातफेरी का भी आयोजन किया जाता है।

हमारे विद्यालय में स्वतन्त्रता दिवस समारोह हमारे विद्यालय में भी स्वतन्त्रता दिवस प्रत्येक वर्ष बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष भी प्रात:काल 8 बजे विद्यालय के प्रांगण में प्रधानाचार्य, अध्यापक और सभी विद्यार्थी उपस्थित हो गये। ध्वजारोहण के साथ उत्सव आरम्भ हुआ। प्रधानाचार्य महोदय ने तिरंगा झण्डा फहराया। एन० सी० सी० कैडेटों ने झण्डे को सलामी दी और स्काउट ने बैण्ड बजाया। सभी ने मिलकर राष्ट्रगान गाया। फिर प्रधानाचार्य, सभी अध्यापक और विद्यार्थी अपने-अपने स्थान पर बैठ गये। सर्वप्रथम कुछ विद्यार्थी बारी-बारी से मंच पर आये और उन्होंने देशभक्ति के गीत सुनाये तथा कविताओं के अलावा ओजपूर्ण भाषण भी दिये। विद्यार्थियों के पश्चात् कुछ अध्यापकों ने भी भाषण दिये। किसी ने स्वतन्त्रता का अर्थ और महत्त्व समझाया तो किसी ने भारतीय संस्कृति और उसके गौरवमय इतिहास पर प्रकाश डाला। अन्त में हमारे प्रधानाचार्य महोदय ने अपना ओजस्वी भाषण दिया तथा विद्यार्थियों को अपने कर्तव्य को ईमानदारी और सच्चाई से पालन करने की शिक्षा दी।

उपसंहार-यह उत्सव देश में सभी स्थानों पर बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। यह हमें इस बात की याद दिलाता है कि इस दिन हम अंग्रेजों की परतन्त्रता की यातनामयी बेड़ियों से बड़ी कठिनाई से मुक्त हुए थे। देश की स्वतन्त्रता के लिए हमारे वीरों को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी; अतः हमें इसकी

तन-मन-धन से रक्षा करनी चाहिए और अवसर पड़ने  पर भारत की एकता और अखण्डता के लिए अपना बलिदान देने हेतु तैयार रहना चाहिए। स्वतन्त्रता के पुनीत पर्व पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपनी स्वतन्त्रता को अमर रखेंगे तथा स्वतन्त्रता-सेनानियों के अधूरे सपनों को साकार करेंगे। उन अमर शहीदों के लिए कृतज्ञ राष्ट्र की यही सर्वश्रेष्ठ श्रद्धांजलि होगी।



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