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निबन्ध:देशाटन

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प्रस्तावना–परिवर्तन प्रकृति का नियम है। मानव का मन भी परिवर्तन चाहता है। जब मनुष्य एक स्थान पर रहता-रहता ऊब जाता है, तब उसकी इच्छा भ्रमण करने की होती है। भ्रमण का जीवन में बहुत महत्त्व है। भ्रमण से पारस्परिक सम्पर्क बढ़ता है, जिससे सद्भाव और मैत्री उत्पन्न होती है। यह ज्ञान-वृद्धि, मनोरंजन, स्वास्थ्य, व्यापार और विश्व-बन्धुत्व की दृष्टि से बहुत उपयोगी है।

देशाटन का अर्थ-‘देशाटन’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है-‘देश’ + ‘अटन’। इसमें देश का अर्थ है–स्थान और ‘अटन’ का अर्थ है-भ्रमण। इस प्रकार देश-विदेश के विभिन्न स्थानों का भ्रमण करना ‘देशाटन’ कहलाता है। जीवन का वास्तविक आनन्द भ्रमण करने में ही निहित है। भ्रमण करने से मनुष्य का ज्ञान और अनुभव भी बढ़ता है। वैसे विज्ञान के आविष्कारों और पुस्तकों के माध्यम से देश-विदेश की बातें ज्ञात हो जाती हैं, लेकिन सच्चा आनन्द और वास्तविक सुख तो प्रत्यक्ष देखने से ही मिलता है।

देशाटन के साधनों का विकास–मानव प्राचीन काल से ही पर्यटन-प्रेमी रहा है। सभ्यता के विकास के मूल में उसकी पर्यटन-प्रियता छिपी है। मनुष्य कभी तीर्थयात्रा के बहाने, कभी व्यापार के लिए तो कभी ज्ञानार्जन के लिए विदेशों की यात्रा पर निकल पड़ता था। ऐसे अनेक उदाहरण हैं कि भारतीय विदेशों में गये और विदेशी यात्री भारत आये। विदेशी यात्रियों में ह्वेनसांग, फाह्यान, वास्कोडिगामा आदि के नाम उल्लेखनीय रहे हैं। पहले पर्यटन के सुगम साधन  उपलब्ध नहीं थे, परन्तु आजकल विज्ञान की उन्नति से देशाटन के विभिन्न साधनों का विकास हो गया है, जिससे मानव थोड़े ही समय में सुदूर देशों की सुविधापूर्वक यात्रा कर सकता है। आज पर्यटन के शौकीन लोगों के लिए दूरस्थ तीर्थस्थलों, ऐतिहासिक इमारतों, गर्जन करते हुए समुद्रों और कल-कल करती हुई नदियों तक पहुँच बनाना यातायात के साधनों के माध्यम से अत्यधिक सरल हो गया है।

देशाटन : एक स्वाभाविक प्रवृत्ति-वैसे तो प्रत्येक व्यक्ति थोड़ा-बहुत घूमना व देश-विदेश का भ्रमण करना चाहता है, परन्तु कुछ लोगों को देशाटन का विशेष शौक होता है। वे साधनों की परवाह न करके उत्साहपूर्वक भ्रमण करते हैं। घुमक्कड़ों का विचार है कि पैदल देशाटन करने में जो आनन्द प्राप्त होता है, वह किसी वाहन से पर्यटन करने में प्राप्त नहीं होता। परिणामस्वरूप आजकल भी लोग पैदल या साइकिल से देश-भ्रमण के लिए निकलते हैं। देशाटन के कारण मनुष्य की जिज्ञासा, खोज-प्रवृत्ति, मनोरंजन एवं अनुभववृत्ति की पूर्ति होती है।

देशाटन का महत्त्व-मनुष्य के जीवन में विभिन्न देशों के भ्रमण का बड़ा महत्त्व है। घूमना-फिरना। मानव की स्वाभाविक प्रवृत्ति है। देश-विदेश में घूमकर मनुष्य अपनी जानकारी बढ़ाता है और मनोविनोद करता है। नये-नये स्थान और वस्तुएँ देखने से उसकी कौतूहल-वृत्ति शान्त होती है तथा उसका पर्याप्त मनोरंजन भी होता है। भ्रमण करने से भौगोलिक, ऐतिहासिक, पुरातत्त्व सम्बन्धी, सामाजिक और राजनीतिक ज्ञान तथा अनुभव में वृद्धि होती है।

देशाटन से लाभ-देशाटन के अनेक लाभ हैं, जो निम्नवत् हैं।

(अ) प्रकृति का सान्निध्य-सर्वप्रथम मनुष्य को प्रकृति से निकटता प्राप्त होती है। प्राकृतिक दृश्यों को देखने से हृदय आनन्दित और शरीर स्वस्थ हो जाता है। उन्मुक्त पशु-पक्षियों की भाँति जीवन आनन्दमय प्रतीत होने लगता है। प्रकृति के सान्निध्य से सादगी एवं सद्गुणों का विकास भी होता है।

(ब) ज्ञान-वृद्धि-पर्यटन से ज्ञान-वृद्धि में सहायता मिलती है। किसी वस्तु का विस्तृत एवं यथार्थ ज्ञान भ्रमण से ही प्राप्त होता है। अजन्ता की गुफाओं, ताजमहल, कुतुबमीनार और ऐतिहासिक चित्तौड़ दुर्ग को देखकर व उन स्थानों से सम्बन्धित तथ्यों और गौरव-गाथाओं को सुनकर जितनी जानकारी होती है, उतनी पुस्तकों को पढ़ने या सुनने से नहीं हो सकती।

(स) मनोरंजन–मनोरंजन का सर्वाधिक उत्तम साधन पर्यटन है। भ्रमण करने से विविध प्रकार की वस्तुएँ देखने को मिलती हैं। हिमाच्छादित पर्वतमालाओं, कल-कल नाद करती हुई नदियों की धाराओं, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थानों को देखने से मन का अवसाद दूर हो जाता है।

(द) विश्व-बन्धुत्व की भावना-देशाटन करने से मैत्रीभाव की वृद्धि होती है। देश-विदेश में भ्रमण करने  से लोगों का सम्पर्क बढ़ता है, भाईचारे की भावना बढ़ती है तथा राष्ट्रीय एकता में वृद्धि होती है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’, अर्थात् सारी वसुधा हमारा कुटुम्ब है, इस विराट भावे की अनुभूति होती है।

(य) व्यापार में वृद्धि–एक स्थान से दूसरे स्थान का भ्रमण करने से वहाँ की कृषि-उपज, खनिज सम्पदा, कलाकृतियों आदि की विशेष जानकारी मिलती है, जिससे व्यापारी लोग व्यापार की सम्भावनाओं का पता लगाकर अपना व्यापार बढ़ाते हैं।
उपर्युक्त लाभों के अतिरिक्त देशाटन से अन्य कई लाभ भी हैं। देशाटन से दृष्टिकोण विस्तृत होता है, अनुभवों का विकास होता है, उदारता और सद्विचारों का उदय होता है, महान् लोगों से सम्पर्क होता है। देशाटन से सहनशीलता, सहानुभूति, सहयोग, मधुर भाषण आदि गुणों का विकास होता है, जो मनुष्य के जीवन में अत्यन्त लाभकारी सिद्ध होते हैं।

देशाटन से हानियाँ-देशाटन की आदत पड़ने से, धन के व्यय की आदत पड़ जाती है। घुमक्कड़ लोग घूमने में ही जीवन बिता देते हैं और भौतिक जीवन की प्रगति करने के प्रति उदासीन हो जाते हैं। जलवायु की भिन्नता, मार्ग की कठिनाइयों और सांस्कृतिक मूल्यों की भिन्नता के कारण कभी-कभी जान-माल से भी हाथ धोना पड़ता है।

उपसंहार-देशाटने हमारे जीवन के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। फलतः प्रत्येक देश में पर्यटन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पर्यटकों के लिए सुख-सुविधाओं के साधन बढ़ गये हैं। लाखों पर्यटक एक देश से दूसरे देश में पहुँचते रहते हैं। सर्वश्रेष्ठ मानव-जीवन को प्राप्त करके  हमें विश्व की अनेक प्रकार की वस्तुओं को देखकर जीवन सफल करना चाहिए। यदि हमें ईश्वर की इस अनुपम सृष्टि का निरीक्षण किये बिना संसार से विदा हो गये तो मन पछताता ही रह जाएगा—

सैर कर दुनिया की गाफिल, जिन्दगानी फिर कहाँ ?
जिन्दगानी गर रही तो, नौजवानी फिर कहाँ ?



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