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निबन्ध:भारत के प्रमुख पर्व

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भूमिका-मानव एक सामाजिक प्राणी है। वह अपने सुख-दुःख का विभाजन अपने समाज के साथ करता है। वह हमेशा अपने कार्य में लीन रहता है तथा अपने बँधे-बँधाये जीवन में परिवर्तन की अपेक्षा रखता है। यह इसीलिए कि वह चाहता है कि दैनिक कार्यों में स्फूर्ति,  आनन्द तथा उत्साह का संचार होता रहे। इस परिवर्तन को वह विविध पर्वो के रूप में मनाता है। इन पर्वो पर वह समाज के सभी लोगों के साथ मिलकर समाज के उत्थान के लिए प्रयासरत रहता है।

राष्ट्रीय-जातीय पर्व-भारत देश अनेकता में एकता लिये हुए है। विभिन्न जातियों, धर्मों और वर्गों के व्यक्तियों ने इस महान देश का निर्माण किया है। इसलिए यहाँ अनेक पर्व वर्ष भर मनाये जाते हैं। इन पर्वो में देश के सभी सहृदय निवासी सहर्ष भाग लेते हैं और आपस में मित्रता, सद्भाव, एकता आदि का परिचय देते हैं। हमारे पर्व–राष्ट्रीय तथा जातीय-दो तरह के हैं। राष्ट्रीय पर्वो के अन्तर्गत स्वतन्त्रता दिवस, गणतन्त्र दिवस और विभिन्न राष्ट्रीय नेताओं के जन्मदिन आते हैं और जातीय पर्यों में भारत में रहने वाले विभिन्न सम्प्रदायों द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर मनाये जाने वाले पर्वो की गणना होती है।

प्रमुख राष्ट्रीय पर्व-राष्ट्रीय पर्वो में सबसे पहला पर्व है-स्वतन्त्रता दिवस। हमारा भारत अनेक वर्षों की परतन्त्रता से 15 अगस्त, 1947 को स्वतन्त्र हुआ था। उसी की याद में प्रति वर्ष 15 अगस्त को सारे देश में स्वतन्त्रता दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। मुख्य समारोह का प्रारम्भ दिल्ली के लाल किले पर प्रधानमन्त्री द्वारा झण्डा फहराने से होता है। देश के प्रमुख नगरों और गाँवों में भी यह पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है।

गणतन्त्र दिवस हमारा दूसरा प्रमुख राष्ट्रीय पर्व है। 26 जनवरी, 1950 को हमारे देश में संविधान लागू किया गया था और इसी दिन भारत को सम्पूर्ण प्रभुत्वसम्पन्न गणराज्य घोषित किया गया था। इसी कारण सम्पूर्ण देश में प्रति वर्ष 26 जनवरी को यह राष्ट्रीय पर्व अत्यन्त उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। इस पर्व का मुख्य समारोह दिल्ली में होता है, जहाँ विशाल झाँकियों से जुलूस निकाला जाता है और राष्ट्रपति सलामी लेते हैं।

हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने हमें स्वाधीनता दिलाने में अपना सर्वस्व न्योछावर कर  दिया था। उनकी याद में उनके जन्म दिवस 2 अक्टूबर को प्रति वर्ष यह राष्ट्रीय पर्व मनाया जाता है। इसके मुख्य समारोह दिल्ली स्थित राजघाट पर और उनके जन्म-स्थान पोरबन्दर पर होते हैं।

इसी प्रकार हमारे प्रथम प्रधानमन्त्री पं० जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन 14 नवम्बर को बाल दिवस के रूप में; डॉ० राधाकृष्णन का जन्मदिवस 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इन पर्वो को छोटे-बड़े सभी भारतवासी मिल-जुलकर धूमधाम से मनाते हैं।

प्रमुख जातीय पर्व-भारत के प्रमुख जातीय पर्यों में सभी जातियों के विभिन्न पर्व देश में समयसमय पर मनाये जाते हैं। इन जातियों में हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख और ईसाई मुख्य हैं।

हिन्दुओं के प्रमुख पर्व-हिन्दुओं में प्रचलित प्रमुख पर्व हैं-होली, दीपावली, दशहरा, रक्षाबन्धन आदि। रक्षाबन्धन को श्रावणी भी पुकारते हैं। प्राचीन परम्परा के अनुसार इस दिन ब्राह्मण दूसरे वर्ग के लोगों को रक्षा-सूत्र बाँधते थे, जिससे रक्षा-सूत्र बँधवाने वाला, देश तथा जाति की रक्षा करना अपना कर्तव्य समझता था। कालान्तर में बहनें अपने भाइयों को रक्षा-सूत्र बाँधने लगीं। मध्यकाल में हिन्दू बहनों ने मुसलमान भाइयों को रक्षा-सूत्र बाँधकर सांस्कृतिक एकता का परिचय दिया था। यह पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

दशहरा या विजयदशमी हिन्दुओं का राष्ट्रव्यापी पर्व है। इस पर्व से पूर्व रामलीलाओं तथा दुर्गापूजा का आयोजन किया जाता है। इस दिन रावण-वध के द्वारा बुरी प्रवृत्तियों पर सदगुणों की विजय प्रदर्शित की जाती है। यह पर्व वीरता, दया, सहानुभूति, आदर्श मैत्री, भक्ति-भावना आदि उच्च गुणों की प्रेरणा देता है।

दीपावली कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाने वाला दीपों का पर्व है। इस दिन लक्ष्मीगणेश जी की पूजा की जाती है और घर-आँगन में दीपों से प्रकाश किया जाता है।
होली हर्षोल्लास का पर्व है। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को होलिका-दहन होता है और चैत्र  कृष्ण प्रतिपदा को होली खेली जाती है। इस दिन लोग परस्पर रंग लगाकर मिलते हैं। होली के दिन अपने-पराये का भेद समाप्त हो जाता है।

सिक्खों के प्रमुख पर्व-सिक्खों का प्रमुख पर्व है-गुरु-पर्व। इसमें गुरु नानक, गुरु गोविन्द सिंह
आदि विभिन्न गुरुओं के जन्मदिन धूमधाम से मनाये जाते हैं, गुरु ग्रन्थ-साहब की वाणी का पाठ किया जाता है, जुलूस निकाले जाते हैं और लंगर (सामूहिक भोज) होते हैं।

ईसाइयों के प्रमुख पर्व–प्रति वर्ष 25 दिसम्बर को क्रिसमस का पर्व अत्यन्त उत्साह से मनाया जाता है। यह महात्मा ईसा मसीह की पुण्य जयन्ती का पर्व है। ईसाइयों का दूसरा प्रमुख पर्व है-ईस्टर, जो 21 मार्च के बाद जब पहली बार पूरा चाँद दिखाई पड़ता है तो उसके पश्चात् आने वाले रविवार को मनाया जाता है। इनके अतिरिक्त दो प्रमुख पर्व हैं-गुड फ्राइडे तथा प्रथम जनवरी (नववर्ष)। ।

मुसलमानों के प्रमुख पर्व-मुसलमानों के पर्वो में रमजान, मुहर्रम, ईद, बकरीद आदि प्रमुख हैं।

उपसंहार–पर्व हमारी सभ्यता तथा संस्कृति के प्रतीक हैं। सैकड़ों वर्षों से ये  हमारे सामाजिक जीवन में नित नवीन प्रेरणा का संचार करते रहे हैं। अत: इन पर्वो का मनाना हमारे लिए उपादेय तथा आवश्यक है।



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