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नहीं कुछ इससे बढ़कर कविता में उल्लेखित मानव के विभिन्न रूप -. Single choice.(1 Point)माँ , किसान , कलाकारभाई , बहन , लेखकमधुकर , सदाचारी , कलाकार​

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ANSWER:

प्रस्तुत पंक्तियाँ नहीं कुछ इससे बढ़कर’ कविता से ली गई हैं। इसके कवि सुमित्रानंदन पंत हैं। प्रस्तुत पंक्ति में मधुकर यानी भ्रमरों का वर्णन है। भ्रमर मधुरस को प्रतिक्षण चखकर विपुल मात्रा में मधु-रूपी मनोवैभव का संचय करते हैं और अपना मधु छत्र बना लेते हैं। उसी प्रकार कलाकार, कवि, बलिदानी पुरुष, कृषक एवं माँ व्यक्ति, समाज व देश के हित में सदैव तत्पर रहते हैं। इनका हृदय दूसरों के लिए द्रवित हो उठता है। इनके कारण ही यह लोक महान बन गया है। अत: इनकी प्रार्थना



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