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Nd religious ble during theगुप्त युग के दौरान सामाजिक और धार्मिक जीवन का विवरण लिखें।​

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गुप्तयुग में सामाजिक और धार्मिक जीवन

गुप्तयुग में सामाजिक जीवन...

गुप्त काल में सामाजिक जीवन में वर्ण व्यवस्था का प्रचलन था और समाज को चार वर्णों ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र में विभाजित किया गया था। ब्राह्मणों को सभी वर्णों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त था। इन चार वर्णों के अलावा गुप्त काल में जाति व्यवस्था अधिक जटिल नहीं थी। गुप्त काल में ब्राह्मण ना केवल धार्मिक कर्मकांड का कार्य करते बल्कि कुछ ब्राह्मण व्यापार-वाणिज्य का कार्य भी करते थे। हालांकि व्यापार-वाणिज्य का मुख्य कार्य वैश्यों का होता था। गुप्तकाल में ही बाद में छोटी-छोटी पेशेवर अस्तित्व में आने लगी थीं, जैसे कि कृषक, पशुपालक, नाटककार, जुलाहा, माली, तेली, बढ़ई आदि।

शूद्रों को को समाज में निम्न स्थान प्राप्त था और वह शहर के बाहर निवास करते थे, क्योंकि उनका कार्य जानवरों का माँस बेचना या मैला आदि ढोना होता था। शूद्रों को चांडाल भी कहा जाता था। गुप्त काल में दास प्रथा का भी प्रचलन था, लेकिन दास प्रथा बहुत अधिक कठोर नही थी, जैसी कि पश्चिमी देशों में होती थी। दास को अपनी सेवा के कार्यकाल को पूर्ण होने के बाद स्वतंत्रता पाने की छूट थी।

महिलाओं को समाज में प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त था, लेकिन विधवाओं की स्थिति बहुत अधिक अच्छी नहीं थी और उन्हें कठोर साधना वाला व सादगी वाला जीवन जीना पड़ता था। कन्याओं का विवाह अल्पायु में ही लगभग 12-14 वर्ष की आयु में ही हो जाता था।  गुप्त काल कुलीन वर्ग की महिलाओं में घूंघट प्रथा का प्रचलन था। गुप्त काल में स्त्रियों को संपत्ति में बराबर का अधिकार मिलता था। पुत्र के अभाव में पति की संपत्ति पर पत्नी का अधिकार होता था।

संगीत, नृत्य, नाटक आदि जैसे विधाये व मनोरंजन के साधन गुप्तकाल में प्रचलित थे और समाज के लोग इसमें पूरी भागीदारी करते थे। वेश्या का भी अस्तित्व था और देवदासियां भी होती थीं, जो मंदिर आदि में गायन आदि का कार्य करती थीं।

गुप्तयुग में धार्मिक जीवन...

गुप्त युग को सनातन धर्म अर्थात आज के हिंदू धर्म के पुनरुत्थान का काल माना जाता है। गुप्त वंश के लोगों का मुख्य धर्म यानी सनातन धर्म की वैष्णव संप्रदाय शाखा थी, लेकिन  उनके काल में शैव संप्रदाय का भी विकास हुआ। गुप्तयुग के राजाओं में धार्मिक सहिष्णुता की भावना पूरी थी और लगभग हर धर्म का विकास हुआ।

गुप्त वंश के लोग वैष्णव धर्म का पालन करते थे अर्थात विष्णु भगवान के उपासक थे, लेकिन उनके काल में शैव सम्प्रदाय का भी विकास हुआ। गुप्तकाल के लोगों में बौद्ध धर्म को बहुत अधिक संरक्षण तो नहीं मिला, लेकिन यह धर्म फिर भी विकसित हुआ। बौद्ध धर्म के मुख्य केंद्र गया, मथुरा, कौशांबी, सारनाथ थे। गुप्त काल में ही जैन धर्म का भी उल्लेखनीय विकास हुआ था।

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