1.

मूल्यवृद्धि नियंत्रण में सार्वजनिक वितरण व्यवस्था की भूमिका स्पष्ट कीजिए ।

Answer»

मूल्यवृद्धि नियंत्रण की व्यूहरचना का एक कदम सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) है, जो भारत में सन् 1977 से लागू की गयी थी।

  • इसका उद्देश्य समाज के निम्न आय समूहों (अंत्योदय) और गरीबी रेखा के नीचे जीनेवाले लोगों (BPL) और गरीबी रेखा के ऊपर के कम आयवाले वर्गों को आवश्यक चीजवस्तुएँ उचित भाव पर उचित मूल्य की दुकानों (FPSS) द्वारा उपलब्ध करवायी जाती है ।
  • वर्तमान में देश में लगभग 4.92 लाख उचित मूल्य की दुकानें है ।
  • इन दुकानों में बिकनेवाली वस्तुओं के भाव खुले बाजार की दुकानों की तुलना में कम होता है ।
  • इन उचित मूल्यों की दुकानों तथा बाजार भाव के अंतर को सरकार चुकाती है, जिसे सबसीडी कहते हैं ।
  • कृत्रिम कमी, संग्रहखोरी और कालाबाजारी में मनचाहे मूल्य वृद्धि की परिस्थिति में गरीबों के जीवन स्तर को टिकाए रखने में यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) आशीर्वाद स्वरूप बनी है, जो मूल्यवृद्धि को नियंत्रित रखती है ।
  • इस व्यवस्था की सफलता का आधार अनाज वितरण और बिक्री की व्यवस्था के लिए कुशल और कार्यक्षम प्रशासन तंत्र पारदर्शी और प्रमाणिक दुकानों पर होता है ।


Discussion

No Comment Found