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Answer» मृदा अपरदन के दुष्प्रभाव निम्नलिखित हैं (1) मृदा उर्वरता में कमी- मृदा अपरदन के कारण भूमि की ऊपरी परत (Top soil) अपने स्थान से | हट जाती है, जिससे भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है; क्योंकि यह परत जीवांशों (humus) के रखने के कारण अधिक उर्वर होती है। (2) सिल्टीकरण मिट्टी के बड़े– बड़े कण नदियों के जल के साथ बहकर जलाशयों में एकत्रित होने लगते हैं। इससे कृषि योग्य भूमि की उर्वरता नष्ट हो जाती है। (3) अकाल- मृदा अपरदन के कारण भूमि की उत्पादकता कम हो जाती है तथा सूखे के समय जल की कमी हो जाने पर सिंचाई की समस्या हो जाती है, जिससे अकाल की स्थिति उत्पन्न हो जाती (4) मरुस्थलीकरण- मृदा अपरदन के कारण भूमि शुष्क व बंजर हो जाती है। इससे मरुस्थल जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। (5) जलवायु में परिवर्तन– मृदा अपरदन के कारण भूमि पर किसी प्रकार की वनस्पति उग नहीं पाती जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव जलवायु पर पड़ता है। वनस्पति के न होने से वर्षा की सम्भावना कम हो जाती है।
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