| 1. |
महत्वपूर्ण गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्याएँ।हल चलाने वाले और भेड़ चराने वाले प्रायः स्वभाव से ही साधु होते हैं। हल चलाने वाले अपने शरीर का हवन किया करते हैं। खेत उनकी हवनशाला है। उनके हवनकुण्ड की ज्वाला की किरणें चावल के लंबे और सफेद दानों के रूप में निकलती हैं। गेहूँ के लाल-लाल दाने इस अग्नि की चिनगारियों की डालियाँ-सी हैं। मैं जब कभी अनार के फूल और फल देखता हूँ तब मुझे बाग के माली का रुधिर याद आ जाता है। उसकी मेहनत के कण जमीन में गिरकर उगे हैं और हवा तथा प्रकाश की सहायता से मीठे फलों के रूप में नजर आ रहे हैं। किसान मुझे अन्न में, फूल में, फल में आहुति देता हुआ सा दिखाई पड़ता है। कहते हैं, ब्रह्माहुति से जगत् पैदा हुआ है। अन्न पैदा करने में किसान भी ब्रह्मा के समान है। खेती उसके ईश्वरी प्रेम का केंद्र है। उसका सारा जीवन पत्ते-पत्ते में, फूल-फूल में, फल-फल में बिखर रही है। |
|
Answer» कठिन शब्दार्थ-साधु = सज्जन, सीधे-सादे। हवन = यज्ञ। ज्वाला = अग्नि। रुधिर = रक्त, खून। आहुति = हवन-सामग्री। ब्रह्माहुति = ब्रह्मा द्वारा यज्ञ की अग्नि में डाले गए पदार्थ जगत = संसार। सन्दर्भ व प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘सृजन’ में संकलित ‘मजदूरी और प्रेम, शीर्षक निबन्ध से लिया गया है। इसके लेखक सरदार पूर्णसिंह हैं। लेखक कहते हैं कि श्रमसाध्य जीवन पवित्र और श्रेष्ठ होता है। किसानों और मजदूरों के कार्य का मूल्य पैसों से नहीं आँका जा सकता। किसान अपने खेत में जो श्रम करता है वही उसकी ईश्वराधना है। अन्न और फल पैदा करने वाला किसान सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा के समान है। व्याख्या-सरदार पूर्ण सिंह श्रम के प्रशंसक हैं। वह कहते हैं कि खेत जोतने वाले किसान तथा भेड़ चराने वाले गड़रिये स्वभाव से ही सीधे-सादे और सज्जन होते हैं। किसानों के खेत उनकी यज्ञशाला हैं। उस यज्ञशाला में वह अपने शरीर का हवन करते हैं। खेत में उपजे चावल के सफेद दाने यज्ञ कुंड से निकलने वाली अग्नि की लपटें हैं। गेहूँ के साफ दाने इस आग में उठने वाली चिनगारियों जैसे प्रतीत होते हैं। अनार के लाल फूलों और फलों को देखकर पता चलता है कि माली ने उनको पैदा करने में अपना खून बहाया है। किसान का श्रम ही खेत में अन्न के दानों के रूप में पैदा हुआ है। वही हवा और पानी पाकर मीठे फलों के रूप में दिखाई दे रहा है। अन्न, फूल एवं फल सभी किसान द्वारा खेत की यज्ञशाला में दी गई आहुति का परिणाम हैं। लेखक को इन सब में किसान के दर्शन होते हैं। बताया जाता है कि ब्रह्मा ने यज्ञ किया था तो हवन कुंड में दी गई आहुति से इस संसार का जन्म हुआ था। किसान भी ब्रह्मा के समान है। वह खेती करके अन्न पैदा करता है। वह ईश्वर के प्रति अपना प्रेम खेत में श्रम करके प्रकट करता है। प्रत्येक पत्ते, फल और फूल में किसान का जीवन समाया हुआ है। विशेष- |
|