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‘मेरे अन्तःकरण में रोज भरतमिलाप का-सा समां बँध जाता है।’–भरतमिलाप का-सा समां बँधने का तात्पर्य क्या है? |
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Answer» लेखक जब पुस्तक उठाता है तो उसको लगता है कि जैसे उसके हाथ जिल्दसाज के हाथों का स्पर्श कर रहे हैं। जिल्दसाज उसका आमरण मित्र बन चुका है। उसने लेखक की एक पुस्तक की जिल्द बाँध कर उसको एक अनुपम प्रेम की भेंट दी है। जिल्दसाज की याद में लेखक का मन आनन्द से उसी प्रकार भर उठती है जिस प्रकार राम और भरत का मन एक दूसरे से मिलकर आनन्द भरसे उठा था। |
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