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‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के नायक चन्द्रशेखर आजाद का चरित्र-चित्रण कीजिए।या‘मातृभूमि के लिए खण्डकाव्य के नायक आजाद के चरित्र-व्यक्तित्व की उल्लेखनीय विशेषताओं का वर्णन कीजिए।या‘मातृभूमि के लिए खण्डकाव्य के आधार पर नायक के चारित्रिक गुणों (विशेषताओं) का, वर्णन कीजिए।या‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के आधार पर चन्द्रशेखर आजाद के स्वदेश-प्रेम का वर्णन कीजिए।या‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के आधार पर उत्कट देशप्रेमी तथा दृढनिश्चयी के रूप में। आजाद का चरित्र-चित्रण कीजिए।या‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य में ‘सूत्रों का रटना छोड़ो, अब स्वतन्त्रता का पाठ पढ़ो’ का उदघोष करने वाले की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।या“चन्द्रशेखर आजाद उत्कृष्ट देशप्रेमी थे।” इस कथन की पुष्टि ‘मातृभूमि के लिए खण्डकाव्य के आधार पर कीजिए।

Answer»

डॉक्टर जयशंकर त्रिपाठी द्वारा रचित ‘मातृभूमि के लिए’ नामक खण्डकाव्य राष्ट्रीय भावना के साक्षात् अवतार एक तरुण देशभक्त के बलिदान की गौरव-गाथा है। कवि ने प्रस्तुत काव्य में मातृभूमि के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों के शोर्य की झाँकी प्रस्तुत करते हुए अमर बलिदानी चन्द्रशेखर आजाद की जीवनगाथा प्रस्तुत की है। वही प्रस्तुत काव्य के नायक हैं।

उनकी चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

(1) देशभक्त–चन्द्रशेखर आजाद का चरित्र एक महान् देशभक्त का चरित्र था। उनका सारा जीवन भारतमाता की स्वाधीनता के लिए संघर्षों में बीता। छात्र-जीवन में जलियाँवाला बाग के नृशंस हत्याकाण्डे को पढ़कर उनका हृदय तिलमिला उठा था। वे उसी समय प्रतिज्ञों करते हैं

इस जन्मभूमि के लिए प्राण, मैं अपने अर्पित कर दूंगा।
आजाद न होगी जब तक यह, मैं कर्म अकल्पित कर दूंगा।

(2) वीर और साहसी–चन्द्रशेखर ने 15 वर्ष की आयु में अंग्रेजी सरकार द्वारा दण्डस्वरूप 16 बेंतों की मार खाते हुए भी प्रत्येक प्रहार के साथ भारतमाता की जय’ बोलकर अपनी अपूर्व देशभक्ति, साहस और वीरता का परिचय दिया था–”वह वीरों का शिरमौर और वह राष्ट्रभक्त अति बाँका था।” अल्फ्रेड पार्क में पुलिस से घिरकर एक घण्टे तक अकेले उसका सामना करते रहना, उनकी वीरता और साहस का ही द्योतक है। मजिस्ट्रेट के सामने दिया गया बयान उनके अतुलनीय साहस को प्रकट करता है। काकोरी स्टेशन के निकट सरकारी खजाने को लूटना उनका एक बड़ा साहसिक कार्य था।

(3) प्रभावशाली व्यक्तित्व–आजाद का बाह्य और आन्तरिक व्यक्तित्व बड़ा प्रभावशाली था। चेहरे पर बड़ी-बड़ी मूंछे, रोबीला चेहरा, बड़ी-बड़ी आँखें, सुगठित हृष्ट-पुष्ट शरीर उनके व्यक्तित्व में चार चाँद लगा देते थे। जितना उनका शरीर मजबूत एवं सुगठित था,  उतना ही उनका स्वभाव मधुर था। कवि ने उनके व्यक्तित्व की प्रशंसा निम्नलिखित शब्दों में की है-

‘पर बालक वह अंगार था-आँखों में उग्र उजाला था।”
वह अपने ओजस्वी भाषण से नवयुवकों को प्रभावित कर लेते थे
आजाद चन्द्रशेखर ऐसा, जिस पर हरेक ।
नवयुवक निछावर होकर होता विस्तृत-सा ॥

(4) अद्भुत संगठनकर्ता–चन्द्रशेखर ने भारत को स्वतन्त्र कराने के लिए देश के समस्त क्रान्तिकारियों को एक मंच पर संगठित करने का अद्भुत कार्य किया था

संगठन शक्ति का, पैसे का, वे करते थे।
व्यक्तित्व खींचता था चुम्बक-सा, अमृत-सा ॥

(5) प्रकृति-प्रेमी-आजाद प्रकृति-प्रेमी थे। जब वे संघर्षों से थक जाते थे, विश्राम करने के लिए प्रकृति की गोद में चले जाते थे तथा वहीं अपने भावी कार्यक्रम की योजना बनाते थे

सातोर नदी के इस तट पर, जननी की मुक्ति सोचता है।
शासन की महाशक्ति से वह, लड़ने की युक्ति सोचता है ॥

(6) महान् क्रान्तिकारी-चन्द्रशेखर महान् क्रान्तिकारी देशभक्त थे। अंग्रेजों के दमन-चक्र के विरोध में असहयोग आन्दोलन को शिथिल पड़ता देखकर उन्होंने सशस्त्र क्रान्ति का अवलम्बन लिया। उन्होंने भगतसिंह जैसे अन्य क्रान्तिकारियों के साथ मिलकर क्रान्ति की ज्वाला सर्वत्र भड़का दी

संयुक्त प्रान्त पूर्वी भारत के क्रान्ति दूत,
आजाद क्रान्ति की आग जलाये जाते थे।

उनका सम्पूर्ण जीवन क्रान्ति और संघर्षों में बीता। उनके आह्वान पर देश के नवयुवक प्राण न्योछावर करने को,उद्यत रहते थे। उन्होंने देश को आजाद कराने के लिए अनेक क्रान्तिकारी योजनाएँ बनायीं।

(7) अपराजेय सेनानी-आजाद अपराजेय, निर्भीक स्वतन्त्रता-सेनानी थे। वे कुशल  संगठनकर्ता और सेनानायक थे। वे क्रान्तिकारी योजनाओं को बड़ी चतुराई से क्रियान्वित किया करते थे। वे ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के कमाण्डर-इन-चीफ थे। उन्होंने बाल्यावस्था में ही यह सिद्ध कर दिया था। कि बड़ा कष्ट सहकर भी वे कभी नहीं झुकेंगे। |

(8) अमर शहीद-बचपन से ही स्वतन्त्रता की आग को हृदय में बसाये हुए चन्द्रशेखर आजाद ने अंग्रेज सरकार को भयभीत कर दिया था। 27 फरवरी, 1931 ई० को प्रयाग के अल्फ्रेड पार्क में उन्होंने अकेले ही अंग्रेज पुलिस से मुकाबला किया और एक सिपाही का जबड़ा तथा अंग्रेज एस० पी० नॉट बाबर की कलाई को गोली से उड़ा दिया। उन्हें जीवित नहीं पकड़ा जा सका था, अपने रिवाल्वर की अन्तिम गोली से उन्होंने अपनी इहलीला समाप्त कर ली। कवि ने उसे हृदयस्पर्शी दृश्य का वर्णन इस प्रकार किया है—

गिर पड़ा वीर पर हिम्मत थी, आने की पास नहीं उनकी ।
कहते थे जीवित होगा यह, क्या जाने गोली कब सनकी।

वास्तव में चन्द्रशेखर आजाद की जीवन-गाथा ‘देशभक्ति और बलिदान की गौरव -गाथा’ है। वह महान् देशभक्त, वीर, साहसी, महान् क्रान्तिकारी, अपराजेय सेनानी और स्वतन्त्रता-प्रेमी थे। इस प्रकार आजाद का सारा जीवन मातृभूमि के लिए संघर्ष का जीवन था। उनका चरित्र भारतीय युवकों को राष्ट्रभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देता रहेगा।



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