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मानव ह्रदय का परिचछैदका चित्र बनाएं तथा इसके भागों का नाम अंकित कीजिए मानव हृदय के परिचय दृश्य का चित्र बनाइए तथा इसके भागों को रोमांचित कीजिए |
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Answer» ong>Explanation: हदय वक्षगुहा में अधर तल की ओर "मध्य से कुछ बायी ओर स्थित होता है| यह लगभग 18 सेमी लम्बा और 9 सेमी चौडा होता है। हृदय मे चार वेश्म होते है, दो अलिन्द तथा दो निलय| हृद पेशियाँ (CARDIAC muscles) सदैव बिना रुके, बिना थके एक निश्चित लय से सिकुड़ती-फैलती रहती हैं| हदय चारों ओर से दोहरे हृद्यावरण (pericardium) से घिरा होता है। दोनों झिल्लियों के मध्य हदयावरणी तरल (pericardial fluid) भरा होता है। यह हदय को बाह्य आघातों से बचाता है| हृदय का अग्र चौडा भाग अलिन्द (AURICLE) तथा पश्च सँकरा भाग निलय (ventricle) कहलाता है|अलिन्द तथा निलय ह्र्द खाँच (coronary sulcus) द्वारा अलग प्रतीत होते हैं|हृदय के दाएँ अलिन्द में शरीर के विभिन्न र्भागों से आया अशुद्ध रक्त भरा होता है। हृदय के बाएँ अलिन्द में फेफडों से आया शुद्ध रक्त भरा रहता है। दोनों निलय एक अन्तरा निलय खाँच द्वारा बँटे दिखाई देते हैं| बायाँ निलय बड़ा और अधिक पेशीय होता है| यह महाधमनी द्वारा शुद्ध रक्त को शरीर में पम्प करने का कार्य करता है| दायाँ निलय फुफ्फुस धमनी (pulmonary artery) द्वारा अशुद्ध रक्त को फेफडों में पहुंचाता है| निलय का अग्रभाग अलिन्दीय उपांग (auricular appendix) से ढका रहता है| Structure of Human Heart हृदय की आन्तरिक संरचना (Internal Structure of Heart): हृदय वक्षगुहा में फेफडों के मध्य स्थित होता है। यह दोहरे हृदयावरण (pericardium) से घिरा होता है। दोनों झिल्लियों के मध्य हृद्यावरणीय तरल (pericardial fluid) भरा होता है। अलिन्द (auricle) एक अन्तरा-असिन्द पट (inter auricular septum) द्वारा दाएँ तथा बाएँ अलिन्द में बँटा होता है। अन्तरा- अलिन्द पट पर एक अण्डाकार गट्टा होता है जिसे फोसा ओवेलिस (fossa ivalis) कहते है। दाएँ अलिन्द में पश्च महाशिरा तथा अग्र महाशिरा के छिद्र होते हैं। पश्च महाशिरा के छिद्र पर यूस्टेकियन कपाट (eustachian valve) होता है। अग्र महाशिरा के छिद्र के ही पास एक छिद्र कोरोनरी साइनस (coronary sinus) होता है। इस छिद्र पर कोरोनरी कपादृ या थिबेसिंयन कपाट (auriculo VENTRICULAR node) होती है। दाएं अलिन्द में अग्र तथा पश्च महाशिराओं के छिद्रों के समीप स्पन्दन केन्द्र या पेस मेकर (pace maker) होता है। इससे हृदय में संकूचन प्रक्रिया प्रारम्भ होती है। अन्तरा-अलिन्द पट पर अलिन्द-निलय गाँठ (auriculo ventricular node) होती है। यह हृदय संकुचन की तरंगों को निलय में प्रेषित करती है। बाएँ अलिन्द में दोनो फुफ्फुसीय शिराएँ एक सम्मिलित छिद्र द्वारा खुलती है। एक अन्तरा-निलय पट (inter-ventricular septum) निलय को दाएँ व बाएँ निलय में बाँटता है। निलय का पेशी स्तर अलिन्द की अपेक्षा बहुत मोटा होता है। बाएँ निलय का पेशी स्तर सबसे अधिक मोटा होता है। निलय की भिति में स्थित मोटे पेशी स्तम्भों को पैपीलरी पेशियों (PAPILLARY muscles) कहते है। दाएँ निलय से पल्मोनरी चाप निकलती है। यह अशुद्ध रुधिर को फेफडों में पहुंचाती है। बाएँ निलय से कैरोटिको सिस्टैंमिक चाप निकलती है, जो सारे शरीर में शुद्ध रुधिर पहुंचाती है। इन चापों के आधार पर तीन-तीन छोटे अर्द्धचन्द्राकार कपाट (semilunar valves) पाए जाते हैं|
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