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माँ से कहानी सुनकर पुत्र ने क्या निर्णय सुनाया?

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पुत्र छोटा था, पर बुद्धिमान था। माँ से कहानी सुनकर उसे पक्षी के प्रति सहानुभूति उत्पन्न हुई। उसने कहा कि यदि कोई किसी निर्दोष को मारे तो दूसरा उसे क्यों न बचाए? न्याय में दया की भावना होनी चाहिए। इसलिए रक्षक (बचानेवाला) हमेशा भक्षक (मारनेवाले) से बड़ा होता है।



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