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 माँ की ईश्वर से मुलाकात हुई या नहींकहना मुश्किल हैपर वह जताती थी जैसेईश्वर से उसकी बातचीत होती रहती हैऔर उससे प्राप्त सलाहों के अनुसारजिंदगी जीने और दुःख्न बरदाश्त करने केरास्ते खोज लेती हैभावार्थ : कवि कहता है कि उसकी माँ और यमराज की मुलाकात हुई या नहीं कहना मुश्किल है । परन्तु माँ बड़े विश्वासपूर्वक कहती थी कि ईश्वर से उसकी बातचीत होती रहती है और उनसे सलाह लेकर ही वह सारा काम करती है । वह उसी सलाह के आधार पर वह जिंदगी जीने और दुख सहने के रास्ते खोज लेती है । उन्हें भी जिंदगी जीने के रास्ते बताती है और समस्याओं से लड़ने की प्रेरणा देती है ।1. कवि विश्वासपूर्वक क्या नहीं कह सकता है ? ।2. माँ किसकी सलाह से काम करती थी ?3. उक्त काव्यांश का मूल भाव क्या है ?4. कवि अपनी माँ के विषय में क्या बताता है ?

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1. कवि विश्वासपूर्वक यह नहीं कह सकता है कि उसकी माँ की ईश्वर से मुलाकात हुई थी या नहीं ।

2. माँ ईश्वर की सलाह से काम करती थी ।

3. काव्यांश का मूल भाव है कि समाज में नाना प्रकार की भ्रांतियाँ फैली हुई थीं ।

4. कवि अपनी माँ के विषय में बताता है कि उसकी माँ का ईश्वर के प्रति गहरा विश्वास था । वह ईश्वर पर भरोसा करके जीवन की राह पर आगे बढ़ती थी ।



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