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लेखक को ऐसा क्यों लगा की उन्हें श्यामा के लिए जीने का संघर्ष करना चाहिए?

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बीमारी में लेखक को कर्ज चुकाने की चिता खाए जा रही थी। उन्होंने अपने आपको मरने के लिए छोड़ दिया था। लेकिन तभी उन्हें श्यामा का ख्याल आया। उन्होंने सोचा कि उन्होंने श्यामा के लिए तो कुछ किया ही नहीं। उसके लिए कुछ करने लायक उनकी स्थिति ही नहीं थी। अब यदि अपने कर्ज का भार भी उस पर छोड़ जाएँ तो उनके जैसा जघन्य अपराधी कौन होगा? यह सोचकर उन्हें लगा कि उन्हें श्यामा के लिए जीने का संघर्ष करना चाहिए।



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