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लेखिका के व्यक्तित्व पर किन-किन व्यक्तियों का किस रूप में प्रभाव पड़ा?

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लेखिका मन्नू भण्डारी के व्यक्तित्व पर दो लोगों का जबरदस्त प्रभाव पड़ा :

पिता का प्रभाव : पिता के अनजाने-अनचाहे व्यवहार ने लेखिका के मन में हीन भावना उत्पन्न कर दीं। लेखिका काले रंग की थी और उनके पिता को गोरा रंग पसन्द था । बड़ी बहन से तुलना होने पर उसके कार्यों की प्रशंसा की जाती थी। परिणामस्वरूप लेखिका अपने को हीन समझने लगी।

यह भावना उनके भीतर इतना घर कर गई थी कि साहित्य क्षेत्र में इतनी प्रसिद्ध, प्रतिष्ठा, मान-सम्मान मिलने पर भी उन्हें अपनी उपलब्धियों पर विश्वास नहीं होता था। आजादी की अलख जगाने तथा राजनैतिक गतिविधियों से अवगत भी वे अपने पिता के कारण ही हुई थी।

शीला अग्रवाल : 

हिन्दी प्राध्यापिका : हिन्दी की प्राध्यापिका शीला अग्रवाल का प्रभाव मन्नू के व्यक्तित्व में उभर कर आया है। साहित्यिक क्षेत्र में प्रवेश कराने का श्रेय भी इनको ही जाता है। इनके सानिध्य में रहकर अनेक साहित्यकारों की रचनाओं को पढ़ा, चर्चा और विचार-विमर्श किया। बाद में कथा लेखिका के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई।

शीला अग्रवाल की जोशीली बातों से, उनके भीतर अंकरित देश-प्रेम की भावनाएं, विशाल वृक्ष जैसी बन गई। उसके प्रभाव में आकर अनेक आन्दोलनों, हड़तालों, भाषणों में सक्रिय भूमिका निभाया। वे निडर होकर हर कार्यों में भाग लेने लगीं। अत: इन दो लोगों की अमिट छाप है लेखिका के व्यक्तित्व पर ।



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