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'लाल केसर’ तथा ‘लाल खड़िया चाक’ के माध्यम से कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?

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कवि ने उषा की लालिमा के आकर्षक दृश्य को पाठकों के हृदय में उतारने के लिए कवि ने दो सुपरिचित उपमानों को चुना है। लाल केसर से बना रंग भी उषा की लालिमा जैसा ही होता है। यदि उससे काली सिल को धो दिया जाय तो आकाश में उषा की लालिमा के दृश्य का आभास कराया जा सकता है। इस प्रकार स्लेट का रंग भी काला होता है। उस पर यदि लाल खड़िया यो चाक मल दिया जाय तो भी उसके माध्यम से काले या नीले आकाश में उषा की लाली को मन के पट पर उतारा जा सकता है। इन दोनों उपमानों से कवि उषा काल के जादू को पाठकों तक पहुँचाना चाहता है।



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