1.

लाभ धन्धे का हार्द हैं ।

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धन्धाकीय प्रवृत्ति का मुख्य और अन्तिम उद्देश्य लाभ का है । लाभ किसी भी धन्धे का लक्ष्य हैं । जिस प्रवृत्ति में लाभ कमाने की वृत्ति न हो उसे धन्धाकीय प्रवृत्ति नहीं कहा जा सकता । व्यापारी किसी भी प्रकार का धन्धा करे फिर वह माल या सेवा का उत्पादन हो या व्यापारी प्रवृत्ति हो व्यक्ति लाभ कमाने की इच्छा रखता है । अगर धन्धे में लाभ कमाने की शक्यता न हो, तो कोई भी व्यक्ति धन्धा करने के लिए आगे नहीं आयेगा । इसलिए लाभ धन्धे के हार्द के समान है ।



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