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क्या स्वतन्त्रता तथा समानता परस्पर विरोधी हैं?यासमानता के आवेश ने स्वतन्त्रता की आशा को व्यर्थ कर दिया।” इस कथन का परीक्षण कीजिए।

Answer»

इस विचारधारा के समर्थकों में डी० टॉकविले, लॉर्ड एक्टन तथा क्रोचे प्रमुख हैं। इनके अनुसार, स्वतन्त्रता एवं समानता एक-दूसरे के विरोधी हैं। स्वतन्त्रता समानता को नष्ट करती है तथा समानता स्वतन्त्रता का विनाश करती है। इस विचारधारा के अनुसार स्वतन्त्रता का अर्थ व्यक्ति की अपनी इच्छानुसार कार्य करने की शक्ति है। व्यक्ति के ऊपर सभी प्रकार के बन्धनों तथा नियन्त्रणों का अभाव ही स्वतन्त्रता है। समानता का आशय सभी क्षेत्रों में बरोबरी से है। अतः स्वतन्त्रता से समानता का हनन होता है तथा समानता से स्वतन्त्रता का अन्त हो जाता है, क्योंकि पूर्ण समानता राज्य के नियन्त्रण से ही सम्भव है तथा राज्य का नियन्त्रण स्वतन्त्रता को समाप्त कर देता है। ऐसी स्थिति में स्वतन्त्रता एवं समानता में से एक की स्थापना ही सम्भव है; अतः ये दोनों परस्पर विरोधी हैं। लॉर्ड एक्टन के अनुसार, समानता की अभिलाषा ने स्वतन्त्रता की आशा को व्यर्थ कर दिया है।”



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